Haryana News : इस सर्दी राशन डिपो पर पड़ने वाले हैं बाजरे के लाले
बारिश से बाजरा की गुणवत्ता प्रभावित, ये सामने आई है वजह
Haryana News : हरियाणा में सर्दी के सीजन में राशन डिपो से मिलने वाले उपभोक्ताओं को इस बार बाजरा के लाले पड़ने जा रहे हैं। जी हां, इस बार सर्दी के सीजन में राशन डिपो मे नवंबर से मार्च माह तक मिलने वाले बाजरे की आपूर्ति नहीं होगी। उपभोक्ताओं को गेहू, चीनी और तेल से ही उपभोक्ताओं को काम चलाना होगा।
दरअसल इस बार बारिश के कारण सरकारी एजेंसियों द्वारा बाजरे की खरीद नहीं की गई। इस कारण सर्दियों के प्रमुख खाद्यान्न बाजरे का वितरण इस बार राशन डिपो (PDS Scheme) के माध्यम से लाभार्थियों को नहीं किया जाएगा। बता दें कि पिछले कुछ वर्षों से सर्दियों में गेहूं के साथ बाजरा भी पीडीएस स्कीम (PDS Scheme) में वितरित किया जाता था।
Haryana News : बारिश के कारण बाजरा की फसल प्रभावित, सैंपल नहीं मिले खरीद के लिए उचित
मगर इस साल सितंबर माह के अंत और अक्टूबर के आरंभ में रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई और बाजरे का रंग बदरंग हो गया। मंडियों में बिकने आए बाजरे के सैंपल सरकारी खरीद एजेंसियों (हैफेड, एचडब्ल्यूसी) ने लैब भेजे, जो खराब गुणक्ता की वजह से पास नहीं हो पाए। लिहाजा इस बार सरकारी एजेंसियों ने बाजरे की खरीद नहीं की।

हरियाणा में गुलाबी कार्डधारक को 35 किलोग्राम गेहूं दिया जाता है तो BPL कार्ड धारकों को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम गेहूं दिया जाएगा। गेहूं के साथ दोनों ही प्रकार के कार्डों पर 1 किलोग्राम चीनी व 2 लीटर सरसों का तेल दिया जाता है। पिछले सालों दोनों ही प्रकार के कार्ड धारकों को सर्दियों में आधे से अधिक बाजरा व गेहूं दिया गया था।
इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने सभी जिला मुख्यालयों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं और डिपो पर लगे POS (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों से भी बाजरा वितरण का विकल्प हटा दिया गया है।
सर्दी में स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है बाजरा
बता दें कि बाजरे की तासीर गर्म होती है और सर्दियों में बाजरा स्वास्थ्य के लिए अनुकूल होता है। प्रदेश में बाजरे की खिचड़ी से लेकर रोटी तक फेवरेट मानी जाती है। ग्रामीण एरिया में तो सर्दियों में यह मुख्य भोजन का हिस्सा होता है। राशन उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी तथा मार्च तक बाजरा मिलेगा लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हरियाणा का कहना है कि इस बार PDS प्रणाली के तहत वितरण के लिए सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा बाजरे की खरीद ही नहीं की गई है। इसकी मुख्य वजह बाजरे की गुणवत्ता रही।










