currency change : बदलता रहा है पैसे का रूप, जानें धातू के पैसे से क्रिप्टो तक का सफर

हजारों सालों में आया बदलाव अब डिजिटल करैंसी का आ रहा जमाना

currency change :  आज के दौर में जब हम कोई सामान खरीदते हैं तो यूपीआई से भुगतान करते हैं। बिना किसी भौतिक मुद्रा के ही लेनदेन हो जाता है। इस लेनदेन में हम करैंसी को छू भी नहीं सकते और काम भी हो जाता है। वहीं अब क्रिप्टो करैंसी का प्रचलन भी बढ़ रहा है। यह बदलाव एक दिन का नहीं, हजारों सालों का सफर है। आइए इसके बारे में बताते हैं।

currency change : पहले के जमाने में पैसे धातू के सिक्कों की शकल में होते थे। दादा- परदादा के जमाने में हमने सुना है कि 1 पैसा, 2 पैसा, 5 पैसा, 10 पैसा, 25 पैसा, 50 पैसा में लेनदेन होता था। हर सिक्के की अपनी पहचान होती थी। जिस धातू से यह सिक्का बनता था, उसकी कीमत भी इसके बराबर ही होती थी। (currency change) ऐसे में सिक्के की कीमत उसके बराबर आंकी जाती थी। अब ऐसा नहीं है। मुद्रित करैंसी नोट की कीमत उस पर छपे अंकों के हिसाब से होती है। पहले के जमाने में सिक्के के रूप भी अलग थे। चकौर, पंचभूजिय, बहुभुजिय सिक्के प्रचलन में रहे हैं। कई सिक्के फूल जैसी आकृति में भी बनाए जाते थे। यह भी आधुनिक सिक्कों में ही गिने जाते हैं। इससे पहले धातू पर सिर्फ ढलाई से अंक की छपाई कर इसकी कीमत निर्धारित की जाती थी। भारत की बात करें तो इन सिक्कों का प्रचलन काफी अधिक रहा है।

currency change : नया है कागजी नोट का प्रचलन

आजादी से पहले जब देशी रियासतों का जमाना था तो हर रियासत के अपने सिक्के होते थे। कागजी नोट की बात करें तो पहली बार भारत में भारत में 1861 में कागज के नोट का प्रचलन शुरू हुआ। तब ब्रिटिश सरकार ने 10 रुपये का नोट जारी किया था। इस नोट पर रानी विक्टोरिया की फोटो की छपाई की गई थी। हालांकि आजादी से पहले ही 1938 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 5 रुपये का नोट प्रचलन में लाया गया। (currency change) इस 5 रुपये के नोट पर किंग जार्ज VI की फाेटो छापी गई। बेशक इससे पहले 1540 में शेरशाह सूरी के कार्यकाल में कागजी मुद्रा चलाई गई, लेकिन यह भारत देश के रूप में नहीं उनके साम्राज्य तक सिमटी रही। हालांकि इस दौर में भी देश की अर्थव्यवस्था अधिकतर सिक्कों पर ही चलती थी। आजकल हम सुनते हैं कि नया पैसा। यह नया पैसा पहली बार 1957 में प्रचलन में आया। इसके साथ ही एक रुपये को 100 भागों में बांट कर 100 पैसे का एक रुपया निर्धारित हुआ। हालांकि एक से लेकर 50 पैसे तक के सिक्के आज मार्केट में प्रयोग नहीं हो रहे हैं। सबसे छोटा सिक्का 1 रुपये का है। हालांकि सरकारों द्वारा विशेष मौकों पर विशेष सिक्के अलग-अलग मूल्य वर्ग के जारी किए जाते हैं, लेकिन यह सिक्के प्रचलन में नहीं रहते। अब भारतीय बाजार में 1, 2, 5, 10 व 20 रुपये मूल्य वर्ग के सिक्के चलते हैं। हालांकि 50 पैसे का सिक्का भी आधिकारिक रूप से प्रचलन से बाहर नहीं किया गया है।

बदलता रहा है पैसे का रूप
बदलता रहा है पैसे का रूप

currency change : सीप से लेकर चमड़े तक की रही मुद्रा

पैसे का स्वरूप इस प्रकार अलग रहा है कि किसी जमाने में सीप भी मुद्रा के रूप में प्रचलित थी। इसको कोड़ी के रूप में जाना जाता था। साबूत कोड़ी और फूटी कोड़ी का मूल्य वर्ग भी अलग होता था। आज भी कहा जाता है कि वह कोड़ी का आदमी नहीं। या फिर उसके पास फूटी कोड़ी तक नहीं। निजाम भिश्ती के शासनकाल में चमड़े के सिक्के भी चले। हालांकि वे सिर्फ ढाई दिन के लिए ही बादशाह रहे।

currency change : क्रिप्टो का भविष्य

नए जमाने में क्रिप्टो करैंसी का प्रचलन भी आ रहा है। हालांकि भारतीय सरकार द्वारा इसको जारी नहीं किया गया है, लेकिन कई सारे क्रिप्टो करैंसी चल रही है। बिटकाइन का एक रूप है। इसक अलावा आजकल कई सारे क्रिप्टो करैंसी बाजार में हैं। संस्थागत निवेश के रूप में इसका प्रचलन किया जा रहा है। (currency change) क्रिप्टो एक प्रकार की डिजिटल करैंसी होती है। आज के समय में बिटकाइन सबसे प्रसिद्ध क्रिप्टो करैंसी है। भारतीय बाजार में बिटकाइन की कीमत काफी अधिक है। इसके अलावा अन्य नामों से भी क्रिप्टो करैंसी चल रही है। इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से निर्धारित होती हैं।

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