New rules for sleeper buses : स्लीपर बस निर्माण को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
आग लगने की घटनाओं पर रोक का प्रयास, नितिन गडकरी बोले निर्माता कंपनी ही बना कर देंगी ऐसी बस
New rules for sleeper buses : स्लीपर बसों में आग लगने से होने वाले हादसों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस प्रकार के हादसे नहीं हों, इसके लिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्लीपर बस का निर्माण या इसकी निर्माता कंपनी ही करेंगी या फिर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा ही किया जाएगा। यह फैसला इस प्रकार की घटनाओं की जांच में पाई जानी वाली एकरूपता के बाद लिया गया है। हालांकि अभी भी देश भर में सड़कों पर हजारों मोडिफाइड बस चल रही हैं, जिन्हें बाहर गैराज में सामान्य बस से स्लीपर बनवाया जाता है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने वीरवार को कहा कि वर्तमान स्लीपर बसों को भी नए सुरक्षा मानकों के साथ अपडेट किया जाना पड़ेगा। यह फैसला सरकार ने स्लीपर कोच बसों में होने वाली आग की घटनाओं को रोकने के लिए किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले के बाद आग जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
मंत्री का कहना है कि इस समय सड़कों पर चल रही स्लीपर कोच बसों में अग्नि शमक सिस्टम, आपातकालीन निकास ( हथौड़े के साथ), इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर को नींद आने की चेतावनी जैसे संकेत लगाना जरूरी कर दिया गया है। क्योंकि पिछले 6 महीनों में स्लीपर कोच बसों से आग लगने के कारण 6 बड़े हादसे हुए हैं। इन हादसों में 145 लोगों की जान चली गई। इसके चलते सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
New rules for sleeper buses : बसों में आग लगने के कारण एक जैसे
यह फैसला इसलिए किया गया है कि सभी बसों में आग लगने के कारण एक जैसे पाए गए हैं। अब इन सभी को ठीक करने की कवायद शुरू की जा रही है। इसका मुख्य कारण सामने आया है कि इन सभी बसों में ज्वलनशील इंटीरियर प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही घटना होने पर जिस संकट द्वार या आपातकाल गेट का प्रयोग किया जाता है, वह या तो बंद हो ता है, या फिर तय मानक के अनुसार चौड़ा नहीं होता। आपातकालीन खिड़की भी या तो गायब मिली हैं, या फिर इनमें कुछ खराबी पाई गई है। बसों में फायर सेफ्टी उपकरण भी पर्याप्त नहीं पाए गए। इसके अलावा बस स्टाफ ऐसी स्थिति के लिए प्रशिक्षित नहीं होता।
New rules for sleeper buses : बस बाडी कोड AIS-052 जरूरी
बस बाडी के लिए जरूरी मानक होता है कोड AIS-052। गडकरी के अनुसार यह मानक देश में बनने वाली सभी बस बाडी के लिए सुरक्षा, संरचना और डिजाइन से जुड़े मानक निर्धािरत करता है। इस कोड को पहले से असंगठित रहे बस बाडी-मेकर सेक्टर को कंट्रोल करने, यात्रियों और चालकों की सुरक्षा बढ़ाने और बस कोच प्रोडक्शन में समानता लाने के लिए लागू किया गया था। यह बस बाडी कोड को 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है। AIS-052 देश में बसों की बाडी निर्माण का डिजाइन सुनिश्चित होता है। इसको सुरक्षा मानकों के अनुरूप तय किया गया है। इस मानक को बस निर्माता, बाडी बनाने वाली कंपनी और परिवहन प्राधिकरणों को लागू करना होता है।

New rules for sleeper buses : सुरक्षा चक्र होता है मजबूत
इस कोड को सभी बसों में लागू कर यात्रियों का सुरक्षा चक्र मजबूत किया जाना है। क्योंकि यह बस बाडी में डिजाइनिंग के साथ आधार रूपरेखा और सीट व्यवस्था, बस के बीचों बीच बने रास्ते को सुनिश्चित करता है। इसके अलावा आपातकाल निकासी द्वार, सीट के अलावा सुरक्षा मानक तय किए जाते हैं। इसके आधार पर ही RTO भी इन बसों को वैध मानते हुए स्वीकृति देता है। जो बस पहले से चल रही हैं, इनमें भी यह बदलाव जरूरी हैं।
New rules for sleeper buses : बस में आग लगने से हुए हादसे
पिछले साल 18 दिसंबर को देहरादून में 40 छात्रों को ले जा रही बस में आग लगने से बड़ा हादसा हुआ। यहां बच्चे तमिलनाडु से उत्तराखंड टूर पर पहुंचे थे। हादसा शिमला बाइपास रोड पर हुआ। हालांकि धुआं उठाता देख बच्चों को नीचे उतार दिया था।
वहीं 16 दिसंबर मथुरा में 8 बसें और 3 कारें टकरा गई थी। इसमें 13 लोग जिंदा जल गए थे।
यह हादसा यमुना एक्सप्रेस-वे पर कोहरे कारण हुआ था। इस हादस में भाजपा नेता की भी मौत हो गई थी। वहीं हादसे में 70 लोग घायल हुए थे। इससे पहले 28 अक्टूबर को राजस्थान के जयपुर में एक बस हाईटेंशन बिजली लाइन से टकरा गई थी। इसमें आग लगने के बाद 2 लोगों की मौत हो गई और 10 लोग झुलस गए थे। इसके अलावा कई अन्य हादसे भी हुए हैं।










