Dog Bite Prevention : बेहद खतरनाक होती है कुत्ते की लार, काट ले तो तुरंत करें इलाज
देश भर में बढ़ रही है डॉग बाइट की घटनाएं, सावधानी नहीं बरती तो पड़ सकते हैं खतरे में
Dog Bite Prevention : कुत्तों के प्रबंधन को लेकर देश भर में नई बहस छिड़ी हुई है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट तक को इस मामले में कड़ा संज्ञान लेना पड़ गया था, लेकिन कई पशु प्रेमियों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई। दरअसल सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाई थी। क्योंकि ऐसे कई मामले आते हैं, जिसमें कुत्तें हिंसक हो जाते हैं।
साथ ही कुत्तों के लिए शेल्टर होम होने की जरूरतों को भी रेखांकित किया जा रहा है। क्योंकि देश भर में डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कुत्तों के काटने से तो खतरा रहता है कि यदि उसकी लार भी किसी घाव पर लग जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश भर में हर साल 40 लाख से अधिक लोग कुत्तों का शिकार होते हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 37 लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले आए। हालांकि 2025 में इनकी संख्या 40 लाख से अधिक हो गई। कई लोगों की जान भी डॉग बाइट के कारण चली जाती है। इसमें मालिकाना कुत्तों के अलावा आवार कुत्तों के ममाले सबसे अधिक आते हैं। देश की बात की जाए तो गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्य सबसे अधिक प्रभावित हैं। हालांकि सभी राज्यों में डॉग बाइट के मामले आते हैं।
बाद में भी आ सकता है असर
चिकित्सकों का मानना है कि डॉग बाइट को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि इसका असर कब आएगा और किस रूप में आएगा इसके बारे में नहीं कहा जा सकता है। किसी दूसरी बीमारी के इलाज के दौरान भी रैबीज का असर आ सकता है। कुछ मामलों में तो कुत्ते का काटने से संक्रमित भैंस का दूध पीने से भी लोग रैबिज से संक्रमित हुए हैं। ऐसे में कुत्ते के काटने पर इलाज जरूरी है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में इंजेक्शन लगाए जाते हैं। यह एंटी रैबीज इंजेक्शन व्यक्ति को सुरक्षित बनाते हैं।
कुत्तों से खेलते समय भी रखें सावधानी
जो लोग कुत्ते पालते हैं, उनको भी चाहिए अपने पालतू को नियमित रूप से टीकाकरण करवाएं। ऐसा करने पर सुरक्षा का दायरा बढ़ जाता है। क्योंकि कुत्ते से खेलते हुए कभी कभी दांत या नाखून से खरोंच लग जाती है। इसको भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह भी रैबिज का कारण बन सकती है। ऐसे में कुत्ते को इंजेक्शन तो लगवाएं हीं ऐसा होने पर खुद को भी इंजेक्शन लगवाने चाहिएं। इसके लिए 4 डोज का कोर्स होता है। यह कोर्स पूरा करना जरूरी है।
बहुत ही देर से आते हैँ लक्षण
कुत्तें के काटने पर आने वाले लक्षण बहुत ही सामान्य होते हैं और देर से आते हैं। ऐसे में व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह रैबीज से संक्रमित हो गया है। डा. राजेश कुमार के अनुसार रैबीज के लक्षण आने में 3 से 12 सप्ताह का समय लगता है। कुछ मामलों में यह कई महीनों के बार दिखाई देते हैं। इसमें जहां कुत्ते ने काटा था उस जगह के पास घाव के पास झुनझुनी आ सकती है। इसके अलावा सिर दर्द, बुखार, सिरदर्द के साथ कमजोरी भी महसूस हो सकती है। व्यक्ति के स्वभाव में आक्रामकता आ सकती है। लंबे समय के बाद यह लकवा जैसी गंभीर अवस्था को भी जन्म दे सकता है।
घाव को धोना ही काफी नहीं है
डा. राजेश कुमार बताते हैं कि कुत्ते के काटने पर कुछ लोग साबुन या डिटोल से घाव को धाते हैं। यह अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एंटी रैबीज इंजेक्शन की जरूरत ही नहीं रही। यह बचाव के लिए उठाया गया एक कदम है। इससे संक्रमण और किटाणु नियंत्रित हो सकते हैं, लेकिन पूरी तरह से इलाज तो एंटी रेबीज का इंजेक्शन कोर्स ही है।










