Vande Bharat Train : इस रूट पर वंदे भारत ट्रेन को नहीं मिल रहे यात्री, क्या है कारण

दूसरी ट्रेनों में सीट नहीं मिलती और वंदे भारत खाली रहती हैं

Vande Bharat Train : वंदे भारत ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में नया इतिहास रच रही है। सुविधाओं से लेकर कम समय में दूरी तय करने में यह ट्रेन हर किसी को पसंद आ रही है, लेकिन एक रूट ऐसा भी है, जिस पर वंदे भारत ट्रेन को यात्री नहीं मिल रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इस रूट पर यात्रियों की कमी है। हालत यह है कि दूसरी ट्रेन में लोगों को सीट तक नहीं मिल पाती, लेकिन वंदे भारत में 500 से अधिक सीट खाली रहती हैं। स्थानीय लोगों ने इसकी मुख्य वजह भी बताई है।

वंदे भारत ट्रेन की सुविधाओं और गति को लाेहा हर कोई मान रहा है। इसके बावजूद प्रयागराज – गोरखपुर रूट पर इस ट्रेन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। यही हालत रही तो इस ट्रेन को बंद भी करना पड़ सकता है। क्योंकि इस ट्रेन में यात्रियों की खासी कमी रहती है। क्योंकि ट्रेन में पर्याप्त संख्या में यात्री नहीं आ रहे हैं। परिणाम यह है कि आधी ट्रेन खाली चल रही है। दरअसल इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया था। पहले यह ट्रेन गोरखपुर से लखनऊ तक चली थी, लेकिन 14 मार्च 2024 को इसका विस्तार प्रयागराज तक कर दिया गया। ऐसे में इस ट्रेन को चलते हुए 2 साल का समय हो चुका है। जब से यह ट्रेन तभी से यात्रियों की समस्या बनी हुई है।

अन्य ट्रेनों में नहीं मिलती जगह

ऐसा नहीं है कि इस रूट पर यात्रियों की कमी है। गोरखपुर और प्रयागराज के बीच करीब डेढ दर्जन ट्रेनों का परिचालन होता है। इसमें कुछ ट्रेन अलग-अलग दिनों चलती हैं तो कुछ नियमित रूप से चलती हैं। इन सभी में सीट पाने के लिए काफी मारामारी रहती है। यहां तक कि वेटिंग भी बढ़ती रहती है। इसके बावजूद बुकिंग चलती है। वहीं वंदे भारत ट्रेन में सीट खाली रहती हैं। वहीं वंदेभारत ट्रेन में 600 से अधिक सीट खोली रहती हैं। इसका मुख्य कारण है कि प्रयागराज से गोरखपुर के लिए इस ट्रेन को दोपहर बाद 3 बजे चलाया जाता है। हालांकि यात्री इसको सुबह के समय चलाने की मांग कर रहे हैं।

सप्ताह में 6 दिन चलती है ट्रेन

यह ट्रेन पहले प्रयागराज – लखनऊ के बीच चलती थी। अब इसका संचालन गोरखपुर तक हो रहा है। 1264 सीटों वाली इस ट्रेन में सबसे अधिक सीट चेयरकार की हैं। इसमें 1150 सीट हैं। इसके अलावा 104 सीट एक्जीक्यूटिव क्लास की हैं। वहीं इसकी दूसरी जोड़ी की ट्रेन गोरखपुर-प्रयागराज में 14 एसी चेयरकार और दो एग्जीक्यूटिव चेयरकार बोगी शामिल हैं। इसमें करीब आधी सीट खाली रहती हैं।

समय पर नहीं मिल रही सुविधा

इस रूट पर सफर करने वाले केतन कुमार ने बताया कि यह ट्रेन यात्रियों को बेहतर सुविधा तो दे रही है, लेकिन इसका समय अनुकूल नहीं है। इसके कारण यात्री इस ट्रेन की ओर नहीं आ पा रहे हैं। काफी लोग व्यापार के चलते नियमित रूप से गोरखपुर आते-जाते हैं। ऐसे में दोपहर बाद 3 बजे का समय उनका रास नहीं आता। हालांकि यह ट्रेन समय बचाती है, लेकिन इसकी टाइमिंग इससे अधिक समय बर्बाद कर देती है। इससे बचने के लिए लोग सस्ते किराये वाली ट्रेन में अधिक समय लगा कर जाना पसंद कर रहे हैं। सुबह चल कर दोपहर तक गोरखपुर पहुंचा जा सकता है। ऐसे में काम का समय मिल जाता है।

दिल्ली से प्रयागराज के बीच बंद ट्रेन शुरू

वहीं माघ मेले के कारण दिल्ली- प्रयागराज के बीच चलने वाली बंद पड़ी ट्रेन को फिर से शुरू कर दिया गया है। यह ट्रेन 46 दिन के बाद दोबारा शुरू हुई है। 18 फरवरी बुधवार को रात 10.10 बजे ट्रेन को प्रयागराज जंक्शन खोला गया। वहीं नई दिल्ली से प्रयागराज पहुंचने वाली ट्रेन सुबह पहुंच गई। माघ मेला के कारण प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन को सूबेदारगंज स्टेशन पर शिफ्ट किया

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