jain muni anuttar sagar : मुनि अनुत्तर सागर ने बिना अन्न जल ग्रहण किए 2400 से अधिक उपवास

अनूठी साधना के बल पर यूएस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हुआ नाम

jain muni anuttar sagar unique meditation : भारत को वीरों और सन्यासियों की धरती कहा जाता है। हम अपने इतिहास में ऐसे कई ऋषियों के बारे में सुनते हैं, जो कई-कई साल तक बिना अन्न व जल ग्रहण किए तपस्या में लीन रहते थे। हालांकि यह बात पुरानी हैं, लेकिन कलयुग में भारत ऐसे मुनियों का साक्षी बन गया है। इनमें एक नाम आता है मुनि अनुत्तर सागर का। मुनि अनुत्तर सागर ने बिना अन्न व जल ग्रहण किए 2400 से अधिक उपवास किए।

मुनि अनुत्तर सागर द्वारा उपवास व मौन के माध्यम से कठोर तपस्या की गई है।  इसके चलते उनका नाम यूएस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया है। मुनि को चरित्र शिरोमणि की उपाधि से भी नवाजा गया है। (jain muni anuttar sagars) हालांकि इससे पहले उनका नाम गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज है।

मंगलगिरी में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर के संघ में मुनि अनुत्तर सागर ने 2400 से अधिक उपवास किए। यह सभी उपवास बिना अन्न जल ग्रहण किए पूर्ण किए गए हैं। अभी भी मुनि के उपवास लगातार जारी हैं। उनकी इसी तपस्या की बदौलत वे यूएस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपनी जगह बना पाए हैं। (jain muni) इसके पहले 1400 उपवास पूर्ण होने पर उनका नाम गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड हो चुका है। मुनि अनुत्तर सागर महाराज अब विश्व भर में जैन धर्म के सर्वाधिक उपवास रखने वाले व्यक्ति बन गए हैं।

jain muni anuttar sagar : एकाहार के साथ 2 दिन तक उपवास

उनके अनुयायियों की मानें तो मुनि एक दिन एकाहार के बाद 2 दिन लगातार उपवास करते हैं। उनकी यह साधना लगातार नियमित रूप से जारी चल रही है। जैन मुनि के अनुसार अभ्यास और साधना के उन्होंने इसको संभव किया है। हालांकि यह उपवास उन्होंने किसी रिकार्ड की लालसा में नहीं किए। यह पूरी प्रक्रिया मोक्ष मार्ग की प्राप्ति के लिए की गई है। (us book of world records).

jain muni anuttar sagar : बचपन से ही कठोर तपस्या की आदत

मुनि अनुत्तर सागर को बचपन से ही कठोर तपस्या की आदत है। हालांकि उन्होंने 2011 में दीक्षा ली थी, लेकिन इससे पहले से ही वे इस प्रक्रिया में हैं। मुनि अनुत्तर सागर भोपाल का जन्म 6 अगस्त 1977 को भोपाल में हुआ। कम उम्र में उनका वैराग्य हो गया।(anuttar sagars) 1996 में वे सन्यास के मार्ग पर आ गए। इसके बाद 2011 में जैन मुनि बने। उनको शुरुआत से ही उपवास व्रत कठिन तपस्या का रुझान रहा। सम्मेद शिखर पर 183 दिनों में से 153 दिन अन्न जल ग्रहण नहीं करते हुए मौन साधना की। वे बचपन से ही 48 और 72 घंटे के कठिन व्रत रखते रहे हैं। जैन मुनि बनने के बाद उन्होंने जैन शास्त्रों में दर्ज उपवास करने शुरू कर दिए। आचार्य विशुद्ध सागर महाराज से अनुत्तर सागर ने जैन शास्त्रों का अध्ययन किया।

अनूठी साधना के बल पर यूएस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हुआ नाम
अनूठी साधना के बल पर यूएस बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हुआ नाम

jain muni anuttar sagar : एक हजार दिन तक रखा मौन

उनके अनुयायियों के अनुसार जैन मुनि अनुत्तर सागर ने कोरोना के 3 वर्षों के दौरान एक हजार दिनों का मौन व्रत किया था। इस दौरान 1008 सहस्त्रनाम का उपवास जारी रहे। इसमें 961 व्रत हो चुके हैं। मुनि के साधक बताते हैं कि यह उपवास इंटिमेट फास्टिंग की तरह किए जाते हैं। (fasted for more than 2400 days) इसमें दो दिन में एक बार अन्न, जल फिर 2 दिन तक अन्न जल का त्या किया जाता है। फिर अन्न जल ग्रहण करके 3 दिन अन्न जल ग्रहण का त्याग किया जाता है। इसी तरह से दिनों की संख्या बढ़ती जाती है। यूं भी जैन मुनि पूरे दिन में एक बार ही जल व आहार लेते हैं।

jain muni anuttar sagar :  पूर्ण चौसठ ऋद्धि व्रत के 64 उपवास किए

तपशुद्धि के 78 उपवास
दु:खहरण के 68 उपवास
सुख कारण के 68 उपवास
सर्वतोभद्र के 75 उपवास
शांतकुंभ के 45 उपवास
नवकार के 35 उपवास
ब्रजमध्य के 29 उपवास
नक्षत्रमाला के 27 उपवास
भावनाविधि के 25 उपवास
कल्याणमाला के 25 उपवास
दीपमालिका के 24 उपवास
तीर्थकर व्रत के 24 उपवास
बारह बिजोरा के 24 उपवास
समवसरण के 24 उपवास
दर्शन विशुद्धि के 24 उपवास

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