पूर्व सैनिकों व आश्रितों को दीवाली का तोहफा

100 प्रतिशत वित्तीय सहायता को सरकार की मंजूरी

एक ओर जहां दीवाली के लिए हर कोई तैयारी कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को भी विशेष तोहफा देने की घोषणा की है। इसके तहत विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। गैर पेंशनभोगी पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सहायता देने का ऐलान किया है।
सरकार ने ऐसे पूर्व सैनिकों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं के तहत विभिन्न मदों में वित्तीय सहायता में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी को स्वीकृ़ति दे दी है। यह फैसला एक नवंबर से लागू हो जाएगा और इसका सीधा लाभ इन पूर्व सैनिकों व उनके आश्रित परिवारों को मिलेगा। इस फैसले की घोषणा के बारे में रक्षा मंत्रालय ने की ओर से कहा गया है कि निराश्रित अनुदान को प्रति लाभार्थी 4,000 रुपये से बढ़ा कर दोगुना कर दिया गया है। अब यह राशि 8,000 रुपये प्रति माह हो गई है। इस फैसले से वृद्ध और गैर-पेंशनभोगी पूर्व सैनिकों को लाभ मिलेगा। 65 वर्ष से अधिक आयु वाली उनकी विधवाओं को भी लाभ दिया जाएगा। निराश्रित अनुदान पहले चार हजार रुपये प्रति महीना था। अब सरकार ने इसको 8,000 रुपये
कर दिया है। यह सहायता ऐसे परिवारों को जीवन पर्यंत दी जाएगी, जिनकी कोई नियमित आय नहीं है। इसके साथ ही पूर्व सैनिकों के आश्रित दो बच्चों को पहली कक्षा से स्नातक कक्षा तक या फिर दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम कर रही उनकी विधवाओं के लिए शिक्षा अनुदान 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये मासिक कर दिया गया है। इसी प्रकार विवाह अनुदान पहले 50,000 रुपये दिया जाता था। इसको बढ़ाकर अब 1,00,000 रुपये प्रति लाभार्थी कर दिया गया है। अनुदान का यह लाभ पूर्व सैनिकों की अधिकतम दो पुत्रियों और विधवा पुनर्विवाह के लिए दिया जाता है।
मंत्रालय का कहना है कि यह फैसला गैर-पेंशनभोगी पूर्व सैनिकों, उनकी विधवाओं या आश्रितों और निम्न आय वर्ग के आश्रितों के लिए सामाजिक सुरक्षा होगा। पूर्व सैनिकों की देश के लिए सेवा को सम्मान देने के लिए यह फैसला किया गया है। सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से सरकार पर हर वर्ष करीब 257 करोड़ रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। फिलहाल देश में पूर्व सैनिकों की संख्या 32 लाख से अधिक है। लगातार सेवानिवृत्ति के चलते हर साल इसमें 60000 की वृद्धि होती है। ऐसे में देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों के लिए यह सरकार का बड़ा तोहफा है।

गंभीर बीमारी में भी मिलता है लाभ
सरकार द्वारा गंभीर बीमारी भी पूर्व सैनिकों को लाभ दिया जाता है। सहायता राशि रोग की स्थिति और गंभीरता के अनुसार ही दी जाती है। पिछली बार अगस्त 2023 में योजना में संसोधन किया गया था। इसमें इलाज के लिए प्रत्येक लाभार्थी इसमें पूर्व सैनिक या आश्रित को प्रतिवर्ष अधिकतम 50,000 रुपये अनुदान दिया जाता है। यह योजना गैर पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को नैत्यिक चिकित्सीय खर्च उठाने के लिए आर्थिक सहायता देती है। योजना के तहत 2019-20 में 36 लार्थियों को 926130 रुपये का लाभ दिया गया। वहीं 2020-21 में 36 लाभार्थियों को 943211 रुपये व 2021-22 में 17 लाभार्थियों को 398942 रुपये दिए गए।

पूर्व सैनिकों के लिए अलग से विभाग
पूर्व सैनिकों की सहायता के लिए अलग से विभाग कार्य करता है। पुनर्वास महानिदेशालय या (डीजीआर), देश के रक्षा मंत्रालय, भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (डीईएसडब्ल्यू) का एक संबद्ध कार्यालय है। यह सेवानिवृति-पूर्व और इसके बाद प्रशिक्षण का आयोजन कर रोजगार के लिए प्रयास करता है। विभिन्न संस्थाओं में कार्य के लिए नियुक्तियों की प्रक्रिया भी इसी कार्यालय से हाेती है। आरंभ में डीजीआर का गठन एजी शाखा सेना मुख्यालय के अंतर्गत किया गया। 1968 में केंद्रीय सैनिक बोर्ड, राज्य सैनिक बोर्ड और जिला सैनिक बोर्ड पुनर्वास निदेशालय के भाग बन गए। इसका मुखिया एक लेफ्टीनेंट जनरल रैंक का अधिकारी रहता है। वर्ष 2004 में डीजीआर कार्यालय भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग, रक्षा मंत्रालय का संबद्ध कार्यालय बन गया। वर्ष 2009 में केंद्रीय सैनिक बोर्ड के विभाजन के बाद डीजीआर में पांच निदेशालय पुनर्वास जोन बनाए गए हैं। पूर्व सैनिक अपनी सुविधा के अनुसार इनसे संपर्क कर सकते हैं।

उत्तरी कमांड, ऊधमपुर
दक्षिणी कमांड, पुणे
मध्य कमांड, लखनऊ
पश्चिमी कमांड, चंडीमंदिर
पूर्वी कमांड, कोलकाता

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