हरियाणा में छोटी होंगी पुलिस अधिकारियों की मेज, कुर्सी से हटेंगे तोलिए
डीजीपी ने दिए आदेश पब्लिक डीलिंग में कमजोर अधिकारियों को नहीं मिलेगी थाने -चौकियों में तैनाती
पिछले दिनों में हरियाणा पुलिस में हुए बड़े घटनाक्रम के बाद नए डीजीपी ओपी सिंह ने कार्यभार संभाल लिया है। इसके बाद उन्होंने पुलिस महकमे में छोटे स्तर पर बड़े बदलावों की पहल की है। यह पहल जनता व पुलिस के बीच नजदीकियां लाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि समय – समय पर पुलिस में बदलावों के प्रयास होते रहे हैं, लेकिन इसका असर नहीं दिखा है। अब नए डीजीपी के आदेश क्या बदलाव लाएंगे, यह समय ही बताएगा।
नए बदलावों के तहत नए डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों के लिए पत्र जारी किया है। इसमें डीजीपी ने कहा है कि अधिकारी अपनी मेज (टेबल) का आकार छोटा करें। साथ ही अधिकारियों की कुर्सी पर तौलिया भी नहीं लगा हो। डीजीपी ओपी सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि सरकारी कार्यालय जनता के पैसे से बनता है। ऐसे में यह यह कार्यालय सत्ता प्रदेर्शन के लिए नहीं, लोगों की मदद के लिए होना चाहिए।
थानों व चौकिंयों में तैनाती नहीं मिलेगी
साथ ही पब्लिक डीलिंग को लेकर भी डीजीपी ओपी सिंह ने अपने आदेश साफ कर दिए हैं। सरकारी पत्र में कहा गया है कि जो अधिकारी व कर्मचारी पब्लिक डीलिंग नहीं जानते, उनको थानों व चौकिंयों में तैनाती नहीं मिलेगी। ओपी सिंह के अनुसार पब्लिक-डीलिंग एक फाइन आर्ट होता है। इसका सीधा जुड़ाव कार्यालय की संरचना, निपुणता व प्रबंधन से होता है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे सबसे पहले अपने कार्यालय की मेज का आकार छोटा करें। कार्यालय में अधिकारी व आने वाले लोगों के लिए लगने वाली कुर्सी भी एक जैसी हाी होनी चाहिए। अधिकारी की कुर्सी पर तौलिए का उपयोग बिलकुल भी नहीं हो। पत्र में तो यह भी लिखा गया है कि इसका कोई तुक नहीं है। साथ ही कार्यालय में आने वालों के लिए उन्होंने कई सुविधा उपलब्ध करवाने को कहा है।
कान्फ्रेस हाल में बैठाया जाए
डीजीपी ने कहा है कि मिलने के लिए आने वालों को कार्यालय के कान्फ्रेस हाल में बैठाया जाए। यदि कान्फ्रेस हाल की सुविधा नहीं है तो कार्यालय में बड़े कमरे को लोगों के लिए तैयार किया जाए। इतना ही नहीं इस कमरे में मुंशी प्रेमचंद, राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर, रेणु जैसे साहित्यकारों की किताबें भी रखी जाएं।
यहां पर एक ऐसे व्यवहार कुशल कर्मचारी को नियुक्त किया जाए, जो लोगों से अच्छी प्रकार से बात कर सके।
बड़े सुधार की पहल करते हुए डीजीपी ने कहा है कि मिलने के लिए आने वालों के मोबाइल फोन से अधिकारी स्वयं को दूर खें। लोगों की बात को ध्यानपूर्वक सुना जाए। शिकायतों को लेकर भी डीजीपी ने साफ निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि यदि आपराधिक मामला उनके पास आता है तो केस दर्ज किया जाए। वहीं यदि मामला सिविल नेचर का है तो इसको सीएम विंडो में भेज दें। यदि किसी मामले में शिकायत झूठी है तो इसको रोजनामचे में दर्ज कर प्रति शिकायतकर्ता को दी जाए।
पहले भी किया था थानों का आडिट
इससे पहलीे निवर्तमान डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने भी इसी साल करीब पांच महीने पहले जिलों में पुलिस का आडिट किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि जनता के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों को सुधारा जाए।
उन्होंने हरियाणा पुलिस पुलिस में तैनात प्रत्येक अधिकारी व कर्मचारी की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आंकलन प्रपत्र तैयार किया था। इसके आधार पर ही पुलिसकर्मियों की ग्रेडिंग भी की गई।
हरियाणा पुलिस में क्यों हुए बड़े बदलाव

दरअसल रोहतक रेंज के आइजी एडीजीपी वाई पूरन कुमार द्वारा आत्महत्या कर ली गई थी। इतने वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी द्वारा आत्महत्या करने का कारण विभागीय प्रताड़ना बताया गया। इसके बाद हरियाणा सरकार ने रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजरानिया व डीजीपी शत्रुजीत कपूर के खिलाफ कार्रवाई की। इसके तहत ही शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया गया। पुलिस महकमे में इस प्रकार के मामले सामने आने के बाद नए डीजीपी ओपी सिंह ने सुधार के लिए पहल शुरू की है।
पुलिस थाना सहयोग केंद्र
पुलिस का नाम आते ही आम आदमी में छवि अच्छी रहे, इसके लिए यह पहल की जा रही है। अब नए डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस थानों को सहयोग केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना पर काम शुरू किया है।
यह सुधार इसी दिशा में बड़ी पहल माने जा रहे हैं। इसके तहत ही पुलिस कार्यालयों में जनता के लिए अनुकूल माहौल के साथ साहित्य भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।










