Asha Bhosle Life Story : आशा भोंसले-सात दशक का अनंत सुरीला सफर
संघर्षो का साक्षात जीवन, हर समय में संगीत को बनाया अपना सहारा
Asha Bhosle Life Story : पार्श्व गायिका आशा भोंसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। आशा भोंसले का जीवन सिर्फ पार्शव गायन के लिए नहीं, जीवन के संघर्षों के लिए भी हमेशा याद किया जाएगा। क्योंकि भारतीय संगीत की दुनिया में जब भी पार्शव गायन का जिक्र होगा, आशा भोंसले का नाम सबसे पहले आएगा। अब भारतीय संगीत की दुनिया में उनका 7 दशक का सफर बेशक थम गया है, लेकिन उनकी आवाज हमेशा हमारे बीच रहेगी।
क्योंकि आशा भोंसले सिर्फ एक व्यक्ति के रूप में नहीं, भारत में पॉप संस्कृति के साथ पार्श्व गायन में एक संस्थान की रहत रही हैं। उनकी बराबरी करना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। आशा भोंसले का जीवन भी हर किसी के लिए प्रेरणा का केंद्र रहेगा। उनके जीवन में अनेक संघर्ष रहे और हमेशा ही उन्होंने संगीत को अपना सहारा बनाया। हालांकि उन्हें खराब आवाज बता कर स्टुडियो से निकाल दिया गया था, लेकिन जिद्द और जुनून ऐसा कि जीवन में विभिन्न भाषाओं में 12 हजार से अधिक गाने गाए।
दिल में नगमे, जीवन में संघर्षों की कहानी
आशो भोंसले का पूरा जीवन बेहद रोकच रहा है। विशेषकर प्रारंभिक जीवन के के संघर्ष। वे दिग्गज दीनानाथ मंगेशकर के परिवार में पैदा हुई और लता मंगेशकर जैसी उच्चकोटी की गायिका उनकी बड़ी बहन थी। इसके बावजूद उनका जीवन स्वयं के लिए काफी संघर्षपूर्ण रहा। क्योंकि उन्होंने महज 16 साल की आयु में शादी की और वह भी अपनी इच्छा से । यह शादी भी जीवन का संघर्ष रही। दो बच्चों के संग अपने संघर्षपूर्ण जीवन को जारी रखा। संगीत के सहारे वे उन ऊंचाईयों तक पहुंची, जिसकी महज कल्पना की जा सकती है।
कठिन राह को अपना कर बनाई नई पहचान
आशा भोंसले जब संगीत की दुनिया में आई तो लता मंगेशकर और गीता दत्त सरीकी गायिकाओं का डंका बजता था। उन्होंने अपने लिए कैबरे शैली के गीतों का चुना। यह गीत पाश्चात्य कल्चर के अनुरूप और तेज गायन के थे। ऐसे में इन गीतों से उनको नई और अलग पहचान मिली। उन्होंने स्वयं को साबित करते हुए अपने लिए जगह बनाई। इससे भारतीय संगीत क्षेत्र में भी नए युग का सूत्रपात हुआ।उनकी आवाज की विविधता आज भी अलग स्थान रखती है।
संगीत ही नहीं, लजीज खाने का भी चला जादू
आशा भोंसले ने अपनी पहचान सिर्फ संगीत और गायन के क्षेत्र में ही नहीं बनाई, बल्कि उनकी पहचान बेहतरी कुक के रूप में भी रही। विशेषकर फिल्मी दुनिया के लोगों में उनके हाथ का खाना बहुत चर्चा का विषय रहा। उनका यह हुनर व्यापार का रूप ले गया और Asha’s ब्रांड के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट काफी प्रसिद्ध हैं।
अंतिम समय तक बनी रही आवाज की खनक
आशा भोंसेले की आवाज पर उम्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। क्योंकि उनका निधन 92 वर्ष की उम्र में हुआ है और अंतिम समय तक उनकी आवाज की खनक बनी रही। इससे साफ हो गया है हुनर के आगे उम्र की कोई प्रमाणिकता नहीं है। उन्होंने हमेशा अपने काम को प्राथमिकता पर रखा। जीवन में बेशक कितने ही संघर्ष आए, लेकिन आशा भोंसले अपनी आशा के साथ लगी रही। हालांकि फेफड़ों की बीमारी के साथ उम्र संबंधित समस्याएं रहीं और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर से उनका निधन हुआ है। इसके बावजूद उनकी आवाज पहले की तरह ही रही।
कहती थी गाना गाते-गाते मरने वाली हूं
आशा भोंसले ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हाेंने कभी भी रिटायरमेंट के बारे में नहीं साेचा है। रिटायरमेंट का ख्याल भी कभी नहीं आता। उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है कि मैं गाते-गाते मरने वाली हूं। तब तक ज़िंदा रहें, जब तक आप काम कर सकते हैं… यह मेरे लिए बहुत बड़ी चीज है। आशा भोंसले ने कहा था कि वे कभी नहीं चहेंगी कि लेटी रहें। उन्हें सभी से यही आशीर्वाद चाहिए था कि वे जब तक रहें, खड़ी रहें। क्योंकि जब तक ही जीने का मजा है और तब तक मरने में मजा है।










