Supreme Court strict on pollution : प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहाहम चुप नहीं बैठ सकते

कोर्ट ने मांगी प्रदूषण नियंत्रण रिपोर्ट, अगली सुनवाई

Supreme Court strict on pollution :  दिल्ली एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण अब सुप्रीम कोर्ट भी सख्त हो चला है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर काफी सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम चुप नहीं बैठ सकते। इस मामले में धान की पराली जलाने को प्रदूषण का एक कारण बताते हुए चीफ जस्टिस ने CAQM से प्रदूषण कम करने की योजनाओं पर रिपोर्ट मांगी।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया किया CAQM एक सप्ताह में रिपोर्ट दे। इस मामले में अगली सुनवाई 10 दिसंबर को हाेनी है।
अदालत में सुनवाई के दौरान CAQM ने बताया कि उसने हितधारकों से चर्चा की है। एएसजी ने कहा कि हरियाणा, पंजाब, CPCB जैसी सभी एजेंसियों की एक्शन रिपोर्ट कोर्ट में दी जा सकती है।  इस पर CJI ने कहा कि अदालत हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती और सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर चर्चा का माहौल दे सकती है।

Supreme Court strict on pollution :  गौरतलब है कि चीफ जस्टिस आफ इंडिया सूर्यकांत ने हाल ही में बाहर टहलने के दौरान तबीयत बिगड़ने की पोस्ट डाली थी। इसके बाद यह मुद्दा और भी गर्म है। अब कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रदूषण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कोविड-19 के समय लोग नीला आसमान और आकाश में तारे देख पा रहे थे, जो दिखाता है कि हवा को साफ किया जा सकता है। CJI ने कहा कि पराली जलाना प्रदूषण का सिर्फ एक कारण है। इसे किसी तरह की राजनीति या अहंकार का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। कोर्ट ने पूछा कि CAQM और राज्य सरकारों की प्रदूषण कम करने वाली योजनाएं आखिर कहां हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए CAQM और राज्य एजेंसियों को अब कमर कसनी होगी। प्रदूषण रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों को दिखाना होगा। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि उन्हें योजनाओं के सिर्फ कागजी रूप से नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए काम से मतलब है। CJI ने सख्त लहजे में कहा कि हम सिर्फ आपकी बातें मान नहीं सकते, समाधान विशेषज्ञों से आना चाहिए।

प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Supreme Court strict on pollution : अंतिम संस्कार में लकड़ी की जगह उपलों पर भी विवाद

दिल्ली में अंतिम संस्कार के दौरान लकड़ी की जगह गाय के गोबर से बने उपलों के प्रयोग को लेकर MCD ने कहा- सिफारिश की थी। इस पर भी विवाद हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्रदूषण बढ़ सकता है। वहीं MCD ने उपलों का प्रयोग करने से अंतिम संस्कार में प्रदूषण कम होने की बात कही है। इसको लेकर कुछ दिन पहले ही दिल्ली नगर निगम (MCD) ने फैसला लिया था। एमसीडी का कहना है कि अब नगर निगम के श्मशान घाटों में लकड़ी के स्थान पर गाय के गोबर से बने उपलों का प्रयोग किया जाएगाप।

दावा किया गया कि इससे प्रदूषण का स्तर कम करने में सहायता मिलेगी। इसको लेकर आई एक स्टडी के अनुसार गाय के गोबर के उपले जलाने से लकड़ी की तुलना में ज्यादा प्रदूषण होगा। (pollution) स्टडी में यह भी कहा गया कि ऐसे घर जहां गोबर के उपलों का प्रयोग किया जाता है, वहां की हवा में प्रदूषित कणों की मात्रा ज्यादा होती है। इसको लेकर MCD के पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा बैठक भी की गई है।

बैठक में श्मशान घाटों में लकड़ी जलाना बंद कर गाय के गोबर के उपलों का प्रयोग करने की बात कही गई। दिल्ली स्थित निगम बोध श्मशान घाट और पंचकुइयां रोड श्मशान घाट में यह तरीका पहले से ही अपनाया जा रहा है। यहां लकड़ी का प्रयोग कम करने के लिए गाय के गोबर के उपले और लकड़ियां उलब्ध करवाई जाती हैं। हालांकि अभी तक अकेले गाय के गोबर के उपलों से दाह संस्कार कहीं भी नहीं किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button