Diesel Vehicle Banned : उत्तर प्रदेश के इन शहरों में डीजल वाहनों को लेकर बड़ा फैसला

मेरठ में 1 जनवरी से नहीं चलेंगे डीजल-पेट्रोल कैब व डिलीवरी वाहन

Diesel Vehicle Banned : दिल्ली एनीसआर में लगतार बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वाहनों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 1 जनवरी से मेरठ में डीजल-पेट्रोल कैब व डिलीवरी वाहन नहीं चलेंगे। सिर्फ सीनएजी व इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। इससे शहर में करीब 15 हजार आटो पर भी असर पड़ेगा।

pollution control : प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए दिल्ली सहित एनसीआर में सरकार व प्रशासन द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसमें धूल कम करने के लिए मशीनरी तैनात की जा रही हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एंटी-स्माग गन तैनात की गई हैं। साथ ही वाटर स्प्रिंकलर्स, मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन प्रयोग की जा रही हैं। प्रशासन का कहना है कि प्रदूषण कम करने के लिए किए जा रहे इन प्रयासों से हवा की गुणवत्ता बेहतर होगी। वहीं वाहनों को लेकर भी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रशासन द्वारा 1 जनवरी 2026 से मेरठ में डीजल और पेट्रोल से चलने वाले कैब-डिलीवरी वाहनों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है। ऐसे में कैब व डिलवरी के रूप में सिर्फ सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों का ही प्रयोग हो सकेगा।परिवहन द्वारा पेट्रोल व डीजल वाहन मालिकों को समय देते हुए अपने वाहन सीएनजी व इलेक्ट्रिक करवाने को कहा गया है। 31 दिसंबर 2025 तक वाहन मालिकों को यह काम करना होगा। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से पेट्रोल व डीजल चालित व्यवसायिक वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी।

दरअसल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का मानना है कि डीजल और पेट्रोल वाहनों का दबाव सड़कों पर अधिक है। यह वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है। ऐसे में आयोग का कहना है कि कैब और डिलीवरी सेवाओं में भारी संख्या में डीजल और पेट्रोल वाहनों का प्रयोग किया जाता है। यह वायु प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहा है। दिल्ली-एनसीआर के मेरठ समेत सभी शहरों में पांच लाख से अधिक डीजल व पेट्रोल चालित मोटर वाहन हैं। जो एग्रीगेटर्स और ई-कामर्स कंपनियों के अधीन काम कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के इन शहरों में डीजल वाहनों को लेकर बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के इन शहरों में डीजल वाहनों को लेकर बड़ा फैसला

साथ ही आनलाइन खाना पहुचाने वाली कंपनियों के लिए काम करने वाले डिलीवरी वाहन भी काफी संख्या में चलते हैं। यही भी प्रदूषण को बढ़ा रहा है। अब आयोग द्वारा इस प्रकार की प्रतिक्रिया देने के बाद प्रशासन ने एनसीआर में आने वाले जिलों में 1 जनवरी से चार पहिया एलसीवीएस, एलजीवीएस (एन वन श्रेणी के 3.5 टन तक) और सभी पेट्रोल-डीजल से चलने वाले दो-पहिया डिलीवरी वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगा दी है।

Diesel Vehicle Banned : मेरठ में नए आटो को परमिट देने पर रोक

प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के तहत अब मेरठ में आटो को नए परमिट देने पर ही रोक लगा दी गई है। मेरठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आता है। ऐसे में प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे तमाम उपायों के तहत ही यह कदम भी उठाया जा रहा हे। इसके तहत डीजल आटो चलाने पर रोक लगा दी गई है। मेरठ शहर में करीब 15 हजार डीजल आटो हैं। इससे इन आटो का बदं होने तय है। हालांकि मेरठ क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने ऐसे वाहनों के लिए नए परमिट जारी करने और परमिट के नवीनीकरण पर भी रोक लगा दी है।

Diesel Vehicle Banned: गाजियाबाद, बागपत में भी वाहनों पर रोक

उत्तर प्रदेश सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों के तहत ही नोएडा, बागपत और गाजियाबाद में भी डीजल चालित आटो रिक्शा पर रोक लगाई हुई है। डीजल व पेट्रोल चालित वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की यह प्रक्रिया यूपी-एनसीआर में अलग अलग चरण में लागू की जाएगी। इसके अलावा नोएडा, ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर)भी डीजल आटो पर प्रतिबंध है।

बागपत में प्रतिबंध लगाते हुए डीजल आटो को 31 दिसंबर 2025 तक ही चलने की अनुमति रहेगी।
साथ ही अधिकारी इस योजना को पूरी तरह लागू करने के लिए कड़ा निगरानी तंत्र बना रहे हैं। इसके तहत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक प्रोजेक्ट मानिटरिंग यूनिट भी गठित कर इसको और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इस यूनिट में शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग, आवासन एवं शहरी नियोजन, उद्योग एवं अवसंरचना विकास विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

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