chaudhary charan singh: …ऐसे थे चौधरी चरण सिंह

सत्ता की चकाचौंध में भी राजनीति के उच्च आदर्शों पर टिके रहे चौधरी साहब

chaudhary charan singh : आज के दौर में यदि सत्ता की बात करें तो भोग विलास और ताकत ही इसके मायने हैं, लेकिन भारतीय राजनीति में काफी नेता ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपने उच्च आदर्शों के कारण राजनीति में खास पहचान बनाई। यहां कि सत्ता की चकाचौंध भी उन्हें डिगा नहीं पाई और अपने आदर्शों पर चलते हुए देश की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के बाद भी जमीन से जुड़े रहे। इनमें से एक नाम है चौधरी चरण सिंह।

चौधरी चरण सिंह ऐसे भारतीय राजनेता हैं, जिन्होंने हमेशा सादगी से जीवन को जीया। लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की सत्त में रहे और देश के प्रधानमंत्री भी बने, लेकिन तो भी राजनीतिक व निजी व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। 23 दिसंबर को चौधरी साहब का जन्मदिन है। उनकी याद में आज भी यह दिन किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। तेवतिया गौत्र के साधारण जाट परिवार में जन्में चौधरी चरण सिंह सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे, लेकिन कभी भी अपनी जड़ों से दूर नहीं हुए।

आईए उनको याद करते हुए उनके जीवन के कुछ किस्सों को सांझा करते हैं। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 को हुआ और 29 मई 1987 को उनका निधन हो गया। वे देश के प्रधानमंत्री बनने वाले दूसरे गैर-कांग्रेसी नेता थे। वे 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक प्रधानमंत्री रहे। 2024 में उन्हें भारत रत्न की घोषणा हुई।

chaudhary charan singh : यूं तो चौधरी चरण सिंह के जीवन से जुड़े हजारों किस्से ऐसे हैं, जो हमेशा ही व्यक्ति को प्रेरित करते हैं। इसमें कुछ का जिक्र कर रहे हैं। चौधरी साहब 12-12 घंटे अपने सरकारी कार्यालय में काम करते थे। किसानों के लिए हमेशा ही वे समर्पित रहे। इसलिए किसान आज भी उनको याद करते हैं। 1966 में चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में वन मंत्री के पद थे। इसी दौरान उको पता चला कि उनकी बेटी सत्यवती बच्चों के साथ आगरा से लखनऊ वन विभाग की जीप से आई हैं।

हालांकि पेट्रोल का पैसा उन्होंने दिया था। इसके बावजूद इसका पता चलने पर चौधरी साहब ने अपने निजी सचिव को बुला कर आदेश दिया कि सरकारी गाड़ी का निजी प्रयोग करने पर जो किराया बनता है, उसका भुगतान उनकी तरफ से किया जाए। साथ ही यह काम दोपहर तक ही करने को भी कहा। हालांकि उनके निजी सचिव रहे तिलकराम ने भी अपनी किताब माई डेज विद चौधरी चरण सिंह में उनके बारे में कई रोचक बातें लिखी हैं।

chaudhary charan singh: ...ऐसे थे चौधरी चरण सिंह
chaudhary charan singh: …ऐसे थे चौधरी चरण सिंह

chaudhary charan singh : जब बाथरूम में मिली फटी हुई धोती

चौधरी चरण सिंह धोती-कुर्ता पहनते थे। वे बहुत ही सादगी का जीवन जीने में विश्वास करते थे, ऐसे में अपने गैर सरकारी कार्य के लिए कभी सरकारी संसाधनों का प्रयोग नहीं करते थे। इसके चलते काफी खर्च हो जाता था और उनकी पत्नी गायत्री देवी को आम ग्रहणी की तरह ही दिक्कतें उठानी पड़ती थी। उनके व्यक्तिगत खर्च का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब भी राजनीतिक या निजी काम के लिए लखनऊ से बाहर ट्रंक फोन काल होते थे, इसका खर्च वे निजीतौर पर उठाते थे। यहां तक कि यदि किसी गैर सरकारी कार्य में जाने के लिए गाड़ी का प्रयोग होता तो इसका खर्च भी घर से ही किया जाता। एक दिन जब चौधरी चरण सिंह नहाने गए तो बाथरूम में फटी हुई धोती मिली। इस पर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि आज कैबिनेट की बैठक है। क्या वे फटी हुई धोती ही पहन के जाएं।

chaudhary charan singh : सिर्फ एक शेरवानी से चलाया काम

चौधरी चरण सिंह बहुत ही सादा जीवन जीते थे। हालांकि 1967 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने, लेकिन इससे पहले मंत्री रहे। इसके बावजूद उनके पास एक ही शेवरवानी थी। एक शेवावानी भी जब खराब हो गई तो 1965 में इसकी मरम्मत करवाई गई। जब इसको टेलर के पास भेजा तो यहां से शेवरवानी गुम हो गई। इसका पता चलने पर चौधरी साहब ने दूसरी नई शेरवानी बनवाने को को कहा।

chaudhary charan singh : मदद क लिए आए पैसों का नहीं लगाया हाथ

चौधरी चरण सिंह तक पहुंचना कोई बहुत मुशकिल काम नहीं था। किसान सामान्यतौर पर उनके पास आते रहते थे। बात 1967 के चुनाव की है। तब चुनाव में आर्थिक मदद करने के लिए उत्तरप्रदेश के ही गाजियाबाद क्षेत्र से कुछ किसान आए और उनके लिए 6100 रुपये रख दिए। तब यह रकम बहुत बड़ी हाेती थी। चौधरी साहब ने इन पैसों को हाथ तक नहीं लगाया। बाद में पता लगाकर जिन लोगों ने पैसे दिए थे, उनकोे वापस भिजवाए गए।

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