100 Million Year Old dinosaur : 10 करोड़ साल पुराने विशाल डायनासोर के जीवांशम मिले, नदियों का क्षेत्र था सहारा रेगिस्तान
10 करोड़ साल पहले उथले पानी में शिकार करते यह विशालकाय प्राणी
100 Million Year Old dinosaur : डायनासोर को लेकर वैज्ञानिकों ने अब नया अपडेट सामने आया है। क्योंकि सहारा रेगिस्तान में 10 करोड़ साल पुराना विशाल डायनासोर के जीवाशम मिले हैं। इससे डायनासोर के बारे में अब तक इतिहास पूरी तरह से बदल गया है। सहारा रेगिस्तान में वैज्ञानिकों ने स्पाइनोसारस मिराबिलिस (Spinosaurus mirabilis) नामक डायनासोर प्रजाति खोज निकाली है। यह प्रजाति करीब 10 करोड़ साल पहले यहां पर पानी में शिकार करती थी। इस डायनासोर के जीवाश्म सहारा रेगिस्तान के नाइजर के जेंगुएबी क्षेत्र में सामने आए हैं।
पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभ को लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है। डायनासोर को ही पृथ्वी पर पहले जीवों के रूप में माना जाता है। अब इसको लेकर भी बड़ी जानकारी वैज्ञानिकों को हाथ लगी है। अब हुई खाेज से यह भी पता चला है कि स्पिनोसारिड डायनासोर पानी में तैरते थे। इस खोज में वैज्ञानिकों का कहना है कि सहारा रेगिस्तान में और भी कई डायनासोर के जीवाश्म सामने आए हैं। ऐसे में यह खोज प्राचीन दुनिया को आधुनिक मानव के समक्ष खोल कर रही है। इससे पृथ्वी पर जीवन लाखों साल पहले से आगे बढ़ कर करोड़ों साल पहले संभव होने की बात स्थापित हो रही है।
टायरेनोसौरस रेक्स के आकार की है यह प्रजाति
हाल ही में खोजी गई इस प्रजाति के बारे में जो मुख्य बात सामने आई है, वह यह है कि इन डायनासोर का आकार टायरेनोसोर रेक्स जितना बड़ा रहा होगा। हालांकि इसको वैज्ञानिकों ने स्पाइनोसारस मिराबिलिस नाम दिया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डायनासोर पृथ्वी पर 9.5 से 10 करोड़ साल पहले मौजूद रहा होगा।
लंबे समय से चल रही थी खोज
ऐसा नहीं है कि इस खोज के लिए वैज्ञानिक अभी लगे हों। पिछले कई साल से शोध के तहत यह खोज की जा रही थी। हालांकि 2019 में सबसे पहले कुछ जीवाशम मिले थे। इसमें डायनासोर के जबड़े के हिस्से सामने आए थे। इसके 3 साल बाद 2 ग्रेस्ट मिले, जो इसके सिर पर मौजूद रहे थे। इसके आधार पर ही नई प्रजाति की पहचान की गई है। इस शोध का नेतृत्व शिकागो यूनिवर्सिटी से जुड़े पाल सेरेनो ने किया है।
मगरमच्छ जैसी बनाव
इसके बारे में शोध कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि इस डायनासोर की बनावट आज के मगरमच्छ जैसी रही होगी। हालांकि यह तब नदियों में रह कर अपना जीवन यापन करते थे। बड़ी मच्छलियों को अपना भोजन बनाने के लिए भी इनके दांत बहुत अच्छे हैं। हालांकि इसको मजाक में एक अनोखा नाम भी दिया गया है, जिसको नरक का बगुला कहा गया। क्योंकि बगुले की तरह यह भी अपने पैरों पर खड़ा होकर पानी में शिकार को दबोच लेता था।
अन्य जीवों की भी हो रही पहचान
अब सहारा रेगिस्तान में स्पाइनोसारस मिराबिलिस के जीवाशं मिलने पर इस क्षेत्र की तब की स्थिति का भी आंकलन हो रहा है। क्योंकि तब यहां नदियों में यह विशालकाय जीव मछलियों को भोजन बनाते थे। यह भी माना जाता है कि इसका क्षेत्र प्राचीन टेथिस सागर के पास रहा होगा। यह डायनासोर पानी में रहने के लिए पूरी तरह से सहज रहा होगा। क्योंकि यह क्षेत्र समुद्र से करीब 600 मील अंदर था। इसके सिर के ऊपर बड़ी हड्डी भी रही होगी।
विशालकाय रहा है डायनासोर
इस खोज से पहले करीब 4 साल पूर्व भी कुछ अहम अवशेष वैज्ञानिकों को मिले थे। क्योंकि यहां मिली खोपड़ी पर पाया गया कि तलवार के आकार की चोटी थी। यही वह चीज है, जो इस प्रजाति को अलग पहचान देती है। शोध टीम का कहना है कि इस डायनासोर की खोपड़ी कंप्यूटर 3 डी के रूप में विकसित करने पर पता चलता है कि यह काफी बड़ा और बहुत भारी रहा होगा।










