Laborer’s son becomes IAS : असफलताओं को हरा कर मजदूर का बेटा बना IAS, 5वें प्रयास में पास की सिविल परीक्षा

देश भर में पाया 107वां रैंक, दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्त्रोत बने रायबरेली के विमल

Laborer’s son becomes IAS : कहते हैं सफलता के लिए जब तक संघर्ष करते रहना चाहिए, जब तक उसे प्राप्त नहीं कर लें। यही कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के रायबरेली स्थित गुरुबख्शगंज के चांदेमऊ गांव निवासी विमल ने। विमल को लोक सेवक बनने का इतना हौसला था कि बार-बार मिली असफलताओं से भी हार नहीं मानी। लगातार प्रयास करते रहे। उनके मेहनत के आगे असफलता को भी हार माननी पड़ी और विमल की जीत हुई।

विमल के पिता रामदेव मजदूर हैं। उनकी माता सियावती भी गृहणी हैं। विपुल ने 5वें प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 पास कर 107वां रैंक प्राप्त किया है। उन्होंने दिखा दिया कि परिवार और स्वयं की परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि व्यक्ति के अंदर जज्बा हो तो हर सफलता पाई जा सकती है। क्योंकि देश की प्रतिष्ठित यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करना कोई आसान काम नहीं है। इस सफलता से जहां विमल का खुद का सपना पूरा हुआ है, वहीं परिवार को भी नई पहचान मिली है। इसके अलावा विमल ऐसे हजारों लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए हैं, जिनके पास संसाधन नहीं हैं।

गांव में ही देखा परीक्षा परिणाम

विमल कुमार के पिता गांव में ही मजदूरी करते हैं। उन्होंने कड़ी मेहनत से अपने बेट को पढ़ा लिखा कर इस योग्य बनाया कि वह देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में जा सके। एक ओर लोग महंगे-महंगे कोचिंग सेंटर से पढ़ाई करने के बाद भी जो परीक्षा पास नहीं कर पाते, वही परीक्षा विमल कुमार खुद पढ़ाई कर पास की है। क्योंंकि उनके पिता मजदूरी करते हैं। विमल कुमार उनके छोटे बेटे हैं। 6 मार्च को जब दोपहर बाद यूपीएससी द्वारा परिणाम घोषित किया गया तो विमल कुमार घर पर ही थे। उन्होंने अपना परीक्षा परिणाम गांव में ही देखा। जब उन्हें पता चला कि उनका रैंक 107वां आया है तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जैसे ही लोगों को इसका पता चला, विमल के घर उसकी खुशी में शामिल होने के लिए काफी लोग पहुंच गए।

गांव के स्कूल से की है पढ़ाई

यूपीएससी की परीक्षा में शानदार रैंक प्राप्त करने वाले विमल ने अपनी शुरूआती पढ़ाई गांव के स्कूल से ही की है। यहां कक्षा पांच तक पढ़ाई के बाद 10वीं तक की शिक्षा महराजगंज के बल्ला बावन बुजुर्ग स्थित नवोदय विद्यालय में की। 10वीं के बाद विमल कुमार ने केरल स्थित नवोदय स्कूल में से इन्टरमीडिएट तक पढ़ाई के बाद वहीं से आईआईटी भी की। यहां से दिल्ली पहुंच कर विमल कुमार ने बीटेक कर अपनी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी जारी रखी।

दिल में था आईएएस बनने का सपना

हालांकि शानदार संस्थानों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद विमल कुमार के पास नौकरी के ऑफर बहुत रहे, लेकिन उनके दिल में आईएएस बनने का सपना था। इसको कभी धुंधला नहीं होने दिया। अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत जारी रखी। वहीं परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी। ऐसे में बिना कोचिंग के ही अपनी पढ़ाई जारी रखी। इससे पहले 4 बार दी सिविल परीक्षा के दौरान 2 बार मेंस मे असफलता मिली, लेकिन 2 बार बार इंटरव्यू तक पहुंच गए, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इससे उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। पिछले साल यानी 2025 में 5वीं बार परीक्षा देते हुए उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सफलता मिल जाएगी।

सपना हुआ पूरा

चूंकि इस परीक्षा में विमल कुमार ने 107वां रैंक प्राप्त किया है, ऐसे में उन्हें आईएएस संवर्ग मिलने जा रहा है। उनका सपना भी यही था। अब आईएसस बनने का सपना पूरा होने पर वे बहुत खुश हैं। विमल कुमार का सबसे बड़ा भाई पुष्पेंद्र विदेश में रहता है और वहां काम करता है। वहीं उससे उससे छोटा भाई अजीत एक बैंक में अस्थाई नौकरी करता है। विमल कुमार की 2 बहनें भी हैं और उनकी शादी हो चुकी है।

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