Childhood Obesity : बचपन से ही शुरू हो रही गंभीर बीमारियां, जीवनशैली बन रही खतरनाक

खराब आहार बढ़ा रहा मोटापा, बच्चों में बढ़ रहा खतरा

Childhood Obesity : बदलती जीवनशैली में आजकल मोटापा काफी सामान्य हो चला है। कुछ समय पहले ते चीन में इस प्रकार के मामले अधिक देखे जाते थे, लेकिन अब भारत में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषकर बच्चों में मोटापा बढ़ने से बचपन से ही गंभीर बीमारियों की शुरूआत हो रही है। इससे बढ़ती उम्र के साथ जोखिम भी बढ़ रहा है। इसमें मुख्यतौर पर आहार यानी खानपान सबसे बड़ा कारण है। इसके कारण बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं। जो आगे चलकर बेहद गंभीर परिणाम देखेंगे।

बच्चों में बढ़ते मोटापे के 2025 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार देश भर में 4 करोड़ से अधिक बच्चे ऐस हैं, जिनका का वजन सामान्य से अधिक है। यानी बॉडी मास इंडेक्स के अनुसार सही नहीं है। हालांकि डेढ़ करोड़ बच्चे ऐसे भी हैं, जो असामान्यरूप से मोटापे से ग्रस्त हैं। ऐसे में यह आंकड़ा बेहुत ही भयावह है।

क्यों होता है बचपन में मोटापा

डाइटीशियन डा. रमेश चंद्र बताते हैं कि इसका मुख्य कारण शारीरिक कार्य में कमी और अव्यवहारिक भोजन है। जो बच्चे उच्च कैलोरी वाला भोजन खाते हैं। जिसमें तले हुए स्नैक्स, शुगर वाले ड्रिंक्स, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड वे इससे ग्रस्त होंगे। इसके लिए जरूरी है बच्चों को घर में बना पोषणयुक्त भोजन दिया जाए। वहीं बच्चों में सक्रियता बहुत जरूरी है। बच्चों को नियमित रूरूप से खेलना कूदना चाहिए। कुछ बच्चे पढ़ाई व मनोरंजन के लिए मोबाइल फोन व टीवी को अधिक समय देते हैं। यह बहुत खतरनाक है। ऐसे बच्चे बाहर निकल ही नहीं पाते।

जीवनशैली बन रही मोटापे का कारण

विशेषज्ञों की मानें तो मोटापा जीवनशैली के कारण हो रहा है। बहुत सारे कारक इसके लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें आहार शैली मुख्य है। इसके अलावा व्यस्त जीवन, तनाव, दिनचर्या में व्यवस्था नहीं होना भी मुख्य कारण हैं। सबसे अधिक गंभीर मामला बच्चों में इस प्रकार की गंभीर स्थिति होना है।

क्योंकि मोटापा बढने से बच्चों में जहां ऊंचाई बढ़नी प्रभावित होती है, वहीं गंभीर बीमारियां भी आ सकती हैं। हालांकि इनका असर समय के साथ अधिक दिखता है। इसमें हृ्दय संबंधित बीमारी, डायबिटीज, कैंसर जैसी बीमारियां चपेट में ले सकती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो हर साल कई सारी मौत भी बढ़ते मोटापे के कारण हो रही हैं।

2 करोड़ बच्चों पर बीमारियों का खतरा

बढ़ते मोटापे के कारण अगले कुछ सालों में करीब 2040 तक 2 करोड़ बच्चे ऐसे हैं, जो गंभीर बीमारियों की चपेट में आने के खतरे में होंगे। इसके अलावा संभावना है कि बॉडी मास इंडेक्स के दायरे 5.6 करोड़ बच्चे बाहर जा चुके होंगे। इसका खतरा 5 से 19 वर्ष के बच्चों में अधिक है। क्योंकि ऐसी स्थिति वाले बच्चों पर उस प्रकार की बीमारियां भी धावा बाले सकती हैं, जो आमतौर पर व्यस्कों में होती हैं।

शारीरिक क्रिया कलापों से दूर हो रहे बच्चे

विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल बच्चे शारीरिक क्रिया कलापों से दूर हो रहे हैं। उनकी जीवनशैली ऐसी हो रही है कि शारीरिक कार्य नहीं के बराबर होते हैं। यही मोटापा बढ़ा रहा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में उच्च ट्राग्लिसिराइड बहुत बड़ी बीमारी होगा। इससे करीब साढ़े 5 करोड़ बच्चे गस्त होंगे। वहीं 4 करोड़ से अधिक बच्चे हाइपरटेंशन जैसी बीमारी से ग्रस्त होंगे। विशेषकर जो बच्चे पैकट बंद खाना अधिक खाते हैं और अधिक चीनी वाले पेय पदार्थ लेते हैं, उनमें खतरा अधिक है।

क्लीनिकल मोटापा

चिकित्कों की भाषा में समझा जाए तो मोटापे की 1 श्रेणी क्लीनिकल है। इसमें पीड़ित का सांस फूलता है। घरघराहट होती है। शरीर में उच्च ट्राई ग्लिसिराइड पाया जाता है। इसके अलावा लिवर फैटी होता है और इससे हार्ट संबंधित बीमारियां अधिक होती हैं। इसके अलावा शरीर में कमजोरी रहती है। जोड़ों के दर्द भी रहता है। दूसरा मोटापा है प्री क्लीनिकल। इसमें वजन अत्यधिक होता है। क्योंकि धीरे-धीरे फैट शरीर में जमने लगती है। यह शुरूआती दौर होता है और इस स्थिति में संभला जा सकता है।

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