UPSC Success Story: हौसले से कैंसर को हरा कर यूपीएससी में पाई सफलता, लिखी जीत की कहानी

छत्तीसगढ़ के संजय दहरिया ने दी युवाओं को प्रेरणा

UPSC Success Story: यूं तो यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले युवाओं की कहानी एक से बढ़ कर एक संघर्षों की गाथा ब्यान करती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के संजय दहरिया की सफलता कई मायने में खास है। साधारण किसान परिवार से आने वाले संजय दहरिया ने यूपीएससी की सिविल परीक्षा पास कर जहां अपनी मेहतन का परिचय दिया है, वहीं उन्होंने यह सफलता कैंसर जैसी बीमारी को हराते हुए पाई है।

संजय दहरिया छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद जिले स्थित बेल्टुकरी गांव से आते हैं। एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाले संजय दहरिया ने अपनी लड़ाई एक साथ दो फ्रंट पर लड़ी है। उनकी 1 लड़ाई कैंसर के खिलाफ रही तो दूसरी यूपीएससी तैयारी की। इस डबल लड़ाई को जीतते हुए संजय दहरिया ने 946वां रैंक प्राप्त कर अपने मेहनत और हौसले को दिखा दिया है।

पिता किसान, मां गृहणी

संजय दहरिया बहुत ही साधारण परिवार से हैं। उनके पिता लखनलाल दहरिया किसान हैं जबकि माता रेशम डहरिया गृहिणी हैं। संजय दहरिया अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। हालांकि उनके दो भाइयों में से एक शिक्षक है। वहीं दूसरा भाई अपने पित के साथ खेती का काम संभालता है। संजय दहरिया ने अपनी शुरूआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से ही की है। हालांकि पांचवीं कक्षा में उनका चयन माना के पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई यहीं से इसी स्कूल से की। इसके बाद उच्चतर शिक्षा महासमुंद के वल्लभाचार्य सरकारी कालेज से करते हुए उन्होंने अपनी स्नातक डिग्री अर्थशास्त्र से की।

बैंक में नौकरी कर चुके हैं संजय दहरिया

संजय दहरिया का चयन इससे पहले वे स्टेट बैंक में चयनित हुए। इस दौरान उनकी सेवा पश्चिम बंगाल राज्य की एक शाखा में रही। यहां करीब दो साल 2009 से 2011 तक उन्होंने सेवा दी। इसके बाद सिविल परीक्षा के लिए नौकरी छोड़ दी और तैयारी में जुट गए। 6 साल के कड़े परिश्रम के बाद अब उन्हें सफलता मिली है।

लार ग्रंथि में कैंसर, नहीं मानी हार

सिविल परीक्षा की तैयारी करते हुए ही 2012 में पता चला कि उन्हें लार की ग्रंथि में कैंसर है। इससे संजय दहरिया ने हार नहीं मानी। बल्कि अपने हौसले से लड़ते रहे। हालांकि इसी दौरान उनका चयन आईडीबीआई बैंक में हो गया और उन्होंने रायपुर में 2013 से 2017 तक नौकरी की। इसके बाद डाक विभाग में भी चयन हुआ।

इस दौरान वे महासमुंद के डाकघर में तैनात रहे। यहां पर संजय दहरिया की सेवाएं 2017 से 2018 तक रही। इसके बाद 2018 में फिर से सिविल परीक्षा के लिए त्यापत्र दे दिया। इसी दौरान 2012 से 2018 तक मुंबई में उनका कैंसर का इलाज चला।

घर में आर्थिक तंगी के बावजूद आगे बढ़े संजय

संजय दहरिया अपने लक्ष्य को लेकर मजबूती से आगे बढ़ते रहे। उन्होंने कभी अपने सपनों को फीका नहीं पड़ने दिया। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने घर की जिम्मेदारियाें को भी संभाला और पढ़ाई भी की। इसके बावजूद मेहनत कर UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास की। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी लड़ते हुए इस सफलता को प्राप्त किया है। अब उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 946वां रैंक प्राप्त किया है।

परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी

संजय दहरिया की यह सफलता परिवार के लिए बहुत ही अधिक उम्मीद लेकर आई है। क्योंकि पढ़ाई के साथ संजय दहरिया के इलाज के दौरान भी काफी सहयोग दिया गया। करीब सात साल तक संजय दहरिया ने कैंसर से लड़ाई लड़ी। उनको कई बार इस इलाज के दौरान ऑपरेश भी करवाना पड़ा। पूरे परिवार ने इस दौरान संजय दहरिया का भरपूर सहयोग दिया। संजय दहरिया का कहना है कि उन्होंने यह परीक्षा पास करने की जिद्द कर ली थी। इसमें परिवार का सहयोग मिला और अब सफलता पा ली है।

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