Women Success Story : महिला की जिद और जुनून ने बुझाई पूरे गांव की प्यास
ओडिशा में 35 वर्षीय महिला ने अकेले खोद डाला कुआं, अब पूरा गांव ले रहा है लाभ
Women Success Story : समाज में कई ऐसे उदाहरण मिल जाते हैं, जो अपने जुनून के चलते पूरी मानव जाति के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनते हैं। ऐसी ही हैं मिसाल बनी हैं ओडिशा की राजधानी भूनेश्वर के पास जंगल क्षेत्र में रहने वाली 35 वर्षीय शकुंतला चतर। शकुंतला चतर ने अपने जुनून के चलते पूरे गांव की प्यास बुझाने का काम किया है। आज हर कोई उनकी इस मेहनत की तारीफ कर रहा है। क्योंकि उन्होंने अकेले ही 60 दिन तक खुदाई कर कुआं खोद डाला। यहां पानी मिलने से अब पूरे गांव की प्यास बुझ रही है।
यह मामला है भूनेश्वर के पास स्थित चंदका डंपदा वाइल्डलाइफ सैक्चुअरी के अंदर बसे एक गांव की। यहां लोगों को करीब एक साल पहले तक पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। गांव में कुल 42 घर हैं। सभी लोग दूर दराज से अपनी जरूरत के लिए पानी लेकर आते थे। इसी चंदका डंपदा वाइल्डलाइफ सैक्चुअरी में रहने वाली 35 वर्षीय शकुंतला ने इस परेशानी का तोड़ निकाला और गांव में ही कुआं तैयार कर दिया।
शकुंतला के पति लादुराम चतर राजमिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने भी शकुंतला के इस काम में मदद की। इसके परिणाम स्वरूप अब गांव में साफ व स्वच्छ पानी उपलब्ध हो गया है। लोगों को खाना बनाने के लिए भी जहां पहले दूर से पानी लाना पड़ता था, अब गांव में ही यह सुविधा हो गई है। इसके लिए शकुंतला चतर द्वारा किए गए प्रयास की हर कोई सराहना कर रहा है।
कुएं से निकाली गई मिट्टी से बनाईं ईंटे
इस प्रयास से न सिर्फ गांव की प्यास बुझी, शकुंतला ने इस कुएं से निकली मिट्टी से ईंट भी तैयार की। इससे करीब 4 हजार ईंट बनी, जिनको अपने घर की मरम्मत के लिए प्रयोग किया गया। ऐसे में जहां गांव वालों को बेहतर पानी मिला है, वहीं शकुंतला की इस मेहनत से उसके घर की मरम्मत भी बिना किसी खर्च के हो गई।
1 घंटे पैदल चल कर लाते थे पानी
ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव के आसपास पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। सभी लोग पानी लाने के लिए करीब 1 घंटा पैदल चलते थे। रास्ते में जंगली जानवर भी मिलते, जिससे खतरा रहता था। साथ ही जो पानी वे लाते थे, वह पीने लायक भी नहीं था। ऐसे में शकुंतला ने इसका बीड़ा उठाया।
शकुंतला चतर गांव के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील कुक के रूप में भी काम करती हैं। इस पर शकुंतला ने गांव में अपनी ही जमीन पर कुआं खोदने का काम शुरू किया और लगातार 60 दिन तक खुदाई की। वे प्रतिदिन 3 से 4 घंटे खुदाई का काम करती थी। करीब 40 फीट की गहराई तक खुदाई होने पर जब पानी मिला तो शकुंतला और गांव वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पहले झरने से लाते थे पानी
ग्रामीणों ने बताया कि पहले पीने और खाना बनाने के लिए पानी का सबसे बड़ा स्त्रोत झरने होते थे। झरने के पानी में जंगली जानवारी भी आते थे। साथ ही पड़ों से भी पत्ते और अन्य गंदगी गिरती रहती थे। ऐसे में लोगों को गंदा पानी पीने को मिलता था। वहीं जब से यह कुआं गांव में बना है, उनकी पानी की समस्या समाप्त हो गई है
ग्रामीणों कभी कभार दिया साथ
इस काम को यूं तो शकुंतला ने अकेले ही अंजाम दिया, लेकिन कुछ ग्रामीणों ने भी कभी कभार उनका साथ दिया। इसमें उनके पति के अलावा कुछ अन्य ग्रामीण भी शामिल रहे। अब कुआं बनने से न सिर्फ शकुंतला के परिवार को ही स्वच्छ पानी मिल जा रहा है, आसपास के कई लोग भी यहीं से पानी लेते हैं। अब शकुंतला का नाम देश में दशरथ मांजी की तरह लिया जा रहा है। जिन्होंने अकेले ही पहाड़ को काट कर रास्ता बना दिया था।










