Repo Rate Unchanged : स्थिर रहेगी रेपो रेट, लोन की EMI में नहीं होगा कोई बदलाव, ब्याज दर कम होने का इंतजार
भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की
Repo Rate Unchanged : विभिन्न प्रकार के लोन चुकाने के लिए EMI भरने वालों के लिए अच्छी खबर है। खबर यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वैश्विक स्थिति के चलते रेपो रेट में इजाफा करने की संभावना थी, लेकिन आरबीआई द्वारा देश करोड़ों लोगों को राहत दी गई है। बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने जारी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश की गई। इसमें फैसला लिया गया है कि नीतिगत रेपो रेट पहले की तरह ही 5.25 रखा जाएगा।
दरअसल आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा 8 अप्रैल 2026 यानी बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश की गई है। हालांकि फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति है, इसके बावजूद मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो रेट 5.25 प्रतिशत ही रखने का फैसला लिया गया है। यह पहले की तरह ही चलती रहेगी। इसमें बदलाव नहीं होने से लोन की ईएमआई भी पहले की तरह ही कटती रहेगी। यानी अधिक राशि नहीं भरनी पड़ेगी।
MPC की हुई गहन समीक्षा बैठक
दरअसल इसके लिए मौद्रिक नीति समिति यानी MPC द्वारा गहन समीक्षा की गई है। यह समीक्षा बैठक 6, 7 और 8 अप्रैल को आयोजित हुई और इसके बाद यह निर्णय लिया गया है। इस दौरान जहां रेपो रेट 5.25% रखने का फैसला लिया गया, वहीं स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00% को स्वीकृति मिली। वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50% रहेगा। साथ ही बैंक रेट 5.50% रखने की सहमति बनी है।
क्या पड़ेगा लोगों पर असर
दरअसल रेपो रेट आम आदमी पर काफी प्रभाव डालती है। क्योंकि इसके बढ़ने से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ सकती है। फिलहाल आरबीआई के फैसल से इसमें कोई वृद्धि नहीं होगी। वहीं लोग उम्मीद कर रहे हैं कि ब्याज दरों में कटौती की जाए। इसके लिए अभी स्थिति साफ नहीं है। भविष्य में इसको लेकर फैसला लिया जा सकता है। वहीं महंगाई पर भी खास असर नहीं होगा। रेपो रेट स्थित रहने से आम आदमी का जीवन सामान्य ही चलेगा। इसमें बदलाव से जरूर कुछ अंतर आ सकता था।
भू राजनीति में दबाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था
गौरतलब है कि फिलहाल ईरान पर अमेरिका व इजराइल द्वारा किए जा रहे हमलों के कारण भू राजनीति में दबाव चल रहा है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्वीकार करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय कठिन दौर से गुजर रही है। क्योंकि पश्चिम एशिया के कारण बढ़ते तनाव से ग्लोबल सप्लाई चेन पर काफी गंभीर असर पड़ा है। इससे कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतें काफी चढ़ी हैं। ऐसे में वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है।
भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद मजबूत
बेशक भू- राजनीतिक अस्थिरता चल रही है, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद अभी भी बहुत मजबूत है। इसको लेकर आरबीआई गवर्नर ने विशेषताैर पर बात रखी। उन्होंने कहा कि विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था इस प्रकार के वैश्विक झटकों को सहन करने के लिए अच्छी स्थिति में है। हालांकि अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण विश्व की अन्य मुद्राओं पर कुछ दबाव देखा जा रहा है। वहीं भारत का विदेशी मुद्रा भंडार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम कर रहा है।
GDP 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
इस दौरान आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7% निर्धारित किा है। हालांकि आरबीआई महंगाई को भी लेकर सतर्क। आरबीआई ने अनुमान जताया है कि महंगाई दर 4.5% रह सकती है। आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि मुख्य प्राथमिकता मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर 4% के लक्ष्य की ओर ले जाने का है।










