New Gold Mine : भारत में फिर होगी स्वर्ण युग की वापसी, देश की इस नई खदान से सालाना निकलेगा 1000 किलोग्राम सोना

जोन्नागिरी परियोजना बनेगी देश का सुनहरा सपना, आर्थिक रूप से सशक्त होगा देश

New Gold Mine : सोना ऐसी धातु है, जिसका नाम आते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था मानचित्र आंखों के आगे घूम हाता है। विशेषकर भारत जैसे देश में जहां हर साल 700 से 800 टन तक सोना विदेशों आयात किया जाता है। वहीं अब जोन्नागिरी परियोजना देश को फिर से स्वर्ण युग में ले जाने को तैयार है। क्योंकि अगले महीने यानी मई में आंध्र प्रदेश में इस खदान से सोना निकालने का काम शुरू हो जाएगा। इससे प्रति वर्ष करीब 1000 किलोग्राम सोना निकाला जा सकेगा।

जोन्नागिरी में फिलहाल 13.1 टन सोने की प्रमाणिकता मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मात्रा बढ़ कर 42 टन तक जा सकती है। यानी भारत में फिर से सोने के भंडार भर रहे हैं। फिलहाल भारत अपनी जरूरत और मांग के अनुसार करीब 90 प्रतिशत तक सोना आयात करता है। ऐसे जोन्नागिरी परियोजना सोने के घरेलू उत्पादन को बढ़ा कर इसके आयात को घटाने में मदद करेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

देश की आजादी के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसको निजी क्षेत्र की कंपनियां विकसित कर रही हैं। ऐसे में यह आजादी के बाद देश की बड़ी उपलब्धी मानी जा रही है। क्योंकि अभी तक भारत में सोने की खदानों का नियंत्रण पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में हैं। कर्नाटक राज्य में स्थित हुट्टी गोल्ड माइन्स अब तक सबसे प्रमुख है। इस परियोजना को निजी कंपनी जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा थ्रिवेणी अर्थमूवर्स और डेक्कन गोल्ड माइन्स की हिस्सेदारी में विकसित किया जा रहा है।

कहां है य गोल्ड माइन

यह विशाल गोल्ड माइन आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिला के जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागिडीराय गांवों के बीच है। फिलहाल करीब 1500 एकड़ में इसका क्षेत्र है। यहां से सोना निकलाने के लिए अब करीब 400 करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है। साथ ही इस परियोजना में नई और आधुनिक तकनीकी से सोना निकाला जाएगा। इसमें जल संचय जैसे आधुनिक कार्यक्रम शामिल हैं। यहां ट्रालय के दौरान ही 40 से 50 किलोग्राम सोना निकाला जा चुका है। अब इसके औपचारिक शुभारंभ का इंतजार है। जो अगले महीने पूरा हो जाएगा।

भारत में कितनी है सोने की खपत

भारत विश्व के बड़े सोना खपत वाले देशों में है। वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 2025-26 में रिकार्ड सोन आयात किया गया है। 2025-26 में इसका मूल्य 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें 24% की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले 721.03 टन सोने का आयात किया गया। वहीं उससे पहले 2024-25 में 757.09 टन सोना विदेशों से मंगवाया गया।

आयात पर घटेगी निर्भरता

विशेषज्ञों का मानना है कि जोन्नागिरी परियोजना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नया दौर लेकर आएगी। क्योंकि इससे देश में सोने का आयात घटेगा। वहीं परियोजना को संचालित कर रही कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में यहां अन्य खनिजों के लिए भी निवेश बढ़ेगा।

माना जा रहा है कि इस परियोजना का शुभारंभ मई महीने में हो सकता है। ऐसे में यह सोने की खदान भारत जैसे देश के लिए बड़ा आर्थिक पिल्लर बन सकती है। क्योंकि अभी आयात काफी अधिक हाता है। इसमें कमी से आने से देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी।

कैसे पड़ेगा असर
दरअसल भारत में कोलार गोल्ड फील्ड्स को वर्ष 2000 में बंद कर दिया गया था। इससे देश में सोने का आयात काफी बढ़ा है।
अभी 700 से 800 का हर साल आयात होता है। अब इस खदान से प्रति वर्ष 1000 किलोग्राम सोना निकलने की संभावना है। हालांकि शुरूआत में यह 500 किलोग्राम रहेगा। अलग 15 साल तक इस माइन से सोना निकलेगा। इससे देश के विदेश मुद्रा भंडार को सुरक्षा मिलेगी

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