AI and Jobs : क्या AI खा जाएगा आपकी नौकरी, चिंता या वास्तविकता जानें सच्चाई, कितनी नौकरी होंगी प्रभावित
विश्व भर की बड़ी कंपनियां एआई में व्यापक स्तर पर निवेश कर रही हैं, ऐसे में नौकरियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा आइए जानते हैं
AI and Jobs : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तकनीक को लेकर जितनी चर्चा है, आज उससे अधिक चर्चा, इसके कारण नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर है। आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एचसी वर्मा जैसे लोग एआई को लेकर अपनी राय दे चुके हैं कि यह इंसानी दिमाग की जगह नहीं ले सकता, लेकिन उन्होंने भीAI को एक बेहतरीन टूल बताया है। इससे डेटा प्रोसेस किया जा सकता है। मौलिकता यानी Originality के मामले में AI इंसानी दिमाग की बराबरी नहीं कर सकता।
इसके बावजूद विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की हालिया रिपोर्ट नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर काफी भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं। क्योंकि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम – फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट में कहा गया है कि नई AI तकनीक के आने से वैश्विक श्रम बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2030 तक विश्व भर में करीब 9.2 करोड़ AI के कारण प्रभावित हो सकती हैं।
नए रोजगार की अपार संभावनाएं
बेशक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम – फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट नौकरियों प्रभावित होने की बात कही गई है, लेकिन इसमें इस क्षेत्र से पैदा होने वाले रोजगार के साधन या नौकरियों को लेकर भी स्थिति साफ की गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में विश्व भर में करीब 17 करोड़ नए रोजगार पैदा होने की भी संभवना है। इस हिसाब से देखा जाए तो नए रोजगार करीब 7.8 करोड़ होंगे। ऐसे में AI से डरने की बजाय इसको सीखा जाना चाहिए।
भारत पर किस प्रकार पड़ेगा असर
विशेषज्ञों की मानें तो भारत में बैंकिंग और स्वास्थ्य के क्षेत्र में AI सबसे अधिक नौकरियों को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में करीब 1.8 करोड़ नौकरियाें पर AI का असर आ सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि एआई से जुड़ी भर्तियों में हर साल करीब 32% की वृद्धि हो रही है।
कर्मचारियों में उथल पुथल की आशंका
अब तक यह साफ हो गया है कि AI के कारण नौकरियों की प्रकृति और प्रवृति बदल रही है। AI नौकरियां समाप्त नहीं हाेंगी, इनका स्वरूप बदल जाएगा। आईआईटी में AI की पढ़ाई कर रहे विशाल सिंह के अनुसार जो लोग फील्ड में काम कर रहे हैं, उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। यानी जिनका को काम डेट संग्रहण का है, वे अपना काम करते रहेंगे, लेकिन जिनका काम डेटा विश्लेषण का है, वे स्वयं को तैयार करें।
श्रम आधारित कार्यों में स्मार्टनेस लाने की तकनीक
दिल्ली आईआईटी के एक छात्र मनोज ने बताया कि AI से श्रम आधारित कार्यों को अधिक सुगमता और अधिक बेहतर उत्पादन के हिसाब से सैट किया जा सकता है। ध्यान रहे, इसमें प्लान व्यक्ति को स्वयं करना होगा कि उसे कैसे काम करना है। इसके लिए AI को समझना जरूरी है।










