Mobile Porting Fraud : दुविधा में डाल सकती है यह सुविधा

मोबाइल नंबर पोर्ट करवाने से हो सकते हैं ठगी का शिकार

Mobile Porting Fraud : आजकल बहुत अच्छी सुविधा है कि यदि हम किसी मोबाइल आपरेटर की सेवाओं से खुश नहीं है तो उसके नंबर को पोर्ट करवा कर दूसरी कंपनी में जा सकते हैं। हालांकि सुविधा अच्छी है, लेकिन साइबर ठगों ने इसके माध्यम से लूट का तरीका निकाल लिया है। ऐसे में यदि आप भी अपना मोबाइल नंबर दूसरी कंपनी में पोर्ट करवाने चाहते हैं तो कुछ सावधानी जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आप भी साइबर ठगों का शिकार बन सकते हैं। आईए जानते हैं साइबर ठगी के इस नए तरीके और बचाव के बारे में।

अब मोबाइल नंबर पोर्ट करवाते समय बहुत अधिक सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि यहां पर यदि छोटी सी लापरवाही भी की तो आपका बैंक खाता खाली हो सकता है। इसको लेकर साइबर पुलिस भी लोगों को जागरूक कर रही है। ताकि लोग नंबर पोर्ट करवाते समय होने वाली ठगी से बच सकें। क्योंकि यह मामला बिहार के आरा में सामने आया है। इस गिरोह का नेटवर्क बिहार व झारखंड तक फैला हुआ मिला है। इसमें 2 भाइयों को भी गिरफ्तार किया गया है। यह दोनों ठग नवादा जिले के रहने वाले हैं।

Mobile Porting Fraud : ऐसे बनाते हैं ठगी का शिकार

पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी अब मोबाइल नंबर पोर्टिंग की प्रक्रिया के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके लिए पहले आम लोगों का मोबाइल नंबर अपने नाम पर पोर्ट कराते थे, फिर उसी नंबर से बैंक, यूपीआई और अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना कर ठगी की जाती है। पकड़े गए मामले में सामने आया है कि लोगों के बैंक खातों से इस माध्यम से पहुंच कर लाखों रुपये निकाले गए। यहां तक कि लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

Mobile Porting Fraud : साइबर पुलिस ने की कार्रवाई

इसको लेकर आरा की साइबर पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई है। आरा साइबर थाने में जो शिकायत दर्ज हुई, उनमें जांच के आधार पर पाया कि दाे भाई इन ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। इनकी काल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने नवादा निवासी दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में दोनों भाईयों ने ठगी की बात भी मानी है। साथ ही पता चला है कि वे लंबे समय से इस प्रकार से ठगी का काम कर रहे हैं। यह गिरोह मोबाइल पोर्ट कराने के नाम पर लोगों की निजी जानकारी प्राप्त कर इसको ठगी में प्रयोग करता है। अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 98 हजार रुपये की नकदी, 1 लैपटाप, 11 मोबाइल फोन, बायोमेट्रिक डिवाइस, कई सारे फर्जी दस्तावेज, सिम कार्ड पकड़े हैं। वहीं पुलिस को आशंका है कि राज्यों में इस गिरोह द्वारा ठगी की गई है।

Mobile Porting Fraud : ग्रामीण होते थे निशाने पर

पुलिस द्वारा की गई जांच में पता चला है कि यह लोग ग्रामीण इलाकों को अपने निशाने पर रखते थे। जहां लोगों को कम तकनीकी जानकारी हो। इन लोगों को अलग अलग प्रकार से बहलाकर मोबाइल नंबर और ओटीपी प्राप्त कर लिया जाता। इन लोगों को बताए बिना ही इनका मोबाइल नंबर पोर्ट कर ठगी की जाती। क्योंकि मोबाइल नंबर पोर्ट होने के बाद यह लोग पीड़ितों के बैंक खातों और यूपीआई ऐप्स को अपने नियंत्रण में ले लेते। इसका ओटीपी अब मूल ग्राहक के पास नहीं जाकर ठगों के पास ही आता। इससे ठगी का काम काफी आसान हो जाता। अब पुलिस द्वारा इस गिरोह के नेटवर्क की जांच की जा रही है।

Mobile Porting Fraud : नंबर पोर्ट कराने में बरतें यह सावधानी

वहीं इस मामले में पुलिस ने लोगों को जगरूक भी किया है। क्योंकि जागरूकता से ही साइबर ठगी का शिकार होने से बचा जा सकता है। ऐसे में पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर पोर्ट कराते समय पूरी सावधानी बरतने की जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति को ओटीपी नहीं दें। इसके अलावा अपने आधार या केवाईसी से जुड़ी जानकारी पूरी तरह से गोनीय रखें। मोबाइल नंबर पोर्ट करवाने के लिए अधिकृत मोबाइल स्टोर अथवा कंपनी के आधिकारिक व्यक्ति की ही मदद लें। यदि कोई संदेह होता है तो इसकी शिकायत पुलिस को जरूर करें।

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