Cloud Seeding : वातावरण में आर्द्रता की कमी से नहीं हो सकी कृत्रिम बारिश

वातावरण में आर्द्रता की कमी से नहीं हो सकी कृत्रिम बारिश, दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलवाने का प्रयास नाकाम

Cloud Seeding :  लगातार बढ़ते प्रदूषण से दिल्ली के लोगों को राहत दिलवाने के लिए सरकार ने क्लाउड सीडिंग द्वारा कृत्रिम बारिश का प्रयास किया, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि वातावरण में आर्द्रता की कमी के कारण यह प्रयोग असफल रहा। कृत्रिम बारिश नहीं होने के कारण दिल्ली के लोगों को प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। हालांकि यह इस प्रकार बारिश करवाने की प्रथम स्वदेशी पहल रही। वैज्ञानिक तरीके से बारिश के क्षेत्र में अभी संभावनाएं बरकरार हैं।

कृत्रिम वर्षा के लिए सेसना विमान द्वारा कानपुर व मेरठ से उड़ान भर कर दिल्ली में क्लाउड सीडिंग का काम पूरा किया गया। इस दौरान बुराड़ी, करोल बाग, मयूर विहार, खेकड़ा, सादकपुर, भोजपुर सहित कई अन्य क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग के लिए हाइग्रोस्कोपिक नमक के फ्लेयर आसमान में छोड़े। (Cloud Seeding) इसके बावजूद बारिश नहीं हो सकी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार वातावरण में आर्द्रता कम रही। कृत्रिम बारिश के लिए निर्धारित आर्द्रता से कम होने के कारण अपेक्षा के अनुसार परिणाम नहीं आए। हालांकि पूरे देश की नजर इस पर लगी हुई थी। इस प्रयोग को सफलता मिलती तो सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण नहीं, सूखे से निपटने के लिए भी इस तकनीक पर विश्वास बनता।

Lack of humidity in the atmosphere prevented artificial rain.
Lack of humidity in the atmosphere prevented artificial rain.

Cloud Seeding :  दिल्ली में कम  रहती है आर्द्रता 

सर्दी के मौसम में स्माग के कारण दिल्ली में आर्द्रता कम ही रहती है। ऐसे में सरकार की योजना है कि फरवरी तक यह प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए 3.21 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है। कलाउड सीडिंग की इस तकनीक को प्रयोग आईआईटी कानपुर की टीम द्वारा किया गया। (Cloud Seeding) कृत्रिम बारिश के लिए क्लाउड सीडिंग की जाती है। इसके लिए सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड के नमक जैसे तत्वों के बहुत ही सूक्ष्म कण वातावरण में छोड़े जाते हैं। यह बारिश लाते हैं। इसके लिए वातावरण उपयुक्त होना चाहिए। इसके तहत हम नमक के महीन मिश्रण का छिड़काव बादलों में किया जाता है। यदि बादलों में उचित आर्द्रता मिलती है तो इससे संघनन हो कर बारिश हो जाती है। इसको ही क्लाउड सीडिंग बोला जाता है। इसके लिए आईआईटी कानपुर में करीब दस लोगों की टीम पिछले कई सालों से शोध कर रही है।

Cloud Seeding :  प्रदूषण में कमी नहीं

बेशक सरकार द्वारा प्रदूषण कम करने के लिए बहुत ही बड़े स्तर पर गंभीर प्रयास किए गए, लेकिन प्रदूषण केस्तर में कमी नहीं आई। केंंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की डेटा रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषण के स्तर में कोई खास अंतर नहीं दिखा। दिल्ली इस समय प्रदूषण की मार को झेल रही है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जारी रहेंगे प्रयास आईआईटी कानपुर की टीम द्वारा कृत्रिम बारिश के प्रयास लगातार किए जाएंगे। मंगलवार की तरह ही बुधवार को भी बादलों की स्थित कृत्रिम बारिश के अनुकूल नहीं रही। (Cloud Seeding) ऐसे में बुधवार को मिशन टाल दिया गया। अब फिर से वातावरण कृत्रिम बारिश के अनुकूल होने का इंतजार किया जा रहा है। ऐसा होने पर फिर से इसके लिए प्रयास किया जाएगा।

Cloud Seeding :  चीन व यूएई में होती है बारिश

इस तकनीक बेशक भारत में पहली बार बारिश का प्रयास किया गया है, लेकिन चीन यह तकनीक लंबे समय से अपना रहा है। चीन में इसके तहत लाखों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बारिश करवाई जाती है। (Cloud Seeding)  इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के क्षेत्रों में भी क्लाउड सीडिंग से कृत्रिम बारिश करवाई जाती रही है। कृषि के लिए अमेरिका में भी सूखाग्रस्त क्षेत्रों में क्लाउड सीडिंग से बारिश करवाई जाती है। हाल ही में सऊदी अरब में जमीन को बंजर होने से रोकने के लिए क्लाउड सीडिंग की गई।

Cloud Seeding : किसानों में चिता

हालांकि प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए सरकार द्वारा कृत्रिम बारिश के लिए क्लाउड सीडिंग करवाई जा रही है वहीं किसान इससे चिंतित हैं। फिलहाल धान की कटाई का काम चल रहा है और दिल्ली के चारों ओर बड़े स्तर पर खेती होती है। ऐसे में हरियाणा के किसान इससे चिंतित हैं। यदि इससे बारिश होती है इसका असर फसल के साथ पूरे कृषि कार्यों पर पड़ेगा।

2 Comments

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