World Soil Day: कमजोर हो रही हरियाणा की मिट्टी, नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी
अधिक उत्पादन और सही फसल चक्र नहीं की कमी से घट रहे पोषक तत्व
World Soil Day : खेत में अंधाधुंध उरर्वरकों का प्रयोग और लगातार फसल लेने के कारण जमीन के पोषक तत्व कम हो रहे हैं। हरियाणा की जमीन कमजोर हो रही है और इसमें नाइट्रोजन व फास्फोरस जैसे तत्वों की कमी हो रही है। इसके लिए किसानों को उत्पादन बनाए रखने में दिक्कत हो रही है। इनकी पूर्ति करने के लिए जमीन में में यूरिया व डीएपी अधिक डालना पड़ रहा है।
कृषि विभाग खेत में नाइट्रोजन पूरा करने के लिए प्रति एकड़ एक बैग यूरिया डालने की सफािरिश करता है, जबकि किसान गेहूं की फसल में तीन से चार बैग तक यूरिया दे रहे हैं। इसका सीधा असर फसल उत्पादन से लेकर इसकी गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। वहीं फसलों का चक्र भी सही नहीं है। अधिकतर किसान हर साल दो ही फसलों को लेते रहे हैं। इसके कारण भी जमीन की ताकत कम हो रही है। न ही गोबर व हरी खाद भी दी जाती, जो नाइट्रोजन, फास्फोरस सहित अन्य जरूरी तत्वों की जमीन में पूरा कर सकती है। इसके चलते हरियाणा प्रदेश में ही जमीन में जैविक कार्बन की कमी है यानि उपजाऊ शक्ति कम हो चुकी है।
World Soil Day: उपजाऊ शक्ति हो रही कम
कृषि विभाग जींद में कार्यरत डा. संत कुमार मलिक के अनुसार 0.75 होती जैविक कार्बन वाली मिट्टी को सबसे अच्छा माना जाता है। जबकि 0.5 से 0.75 प्रतिशत जैविक कार्बन की मात्रा है मध्यम उपजाऊ श्रेणी में आती है। इसके विपरीत हरियाणा प्रदेश में औसतन जैविक कार्बन की मात्रा 0.4 प्रतिशत है। फसल अवशेष जलाना भी जैविक कार्बन घटने का बड़ा कारण है। पराली व अन्य फसल अवशेषों में काफी पोषक तत्व विद्यमान होते हैं। अगर फसल अवशेष को जलाने की बजाय खेत में मिलाया जाए, तो मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारा जा सकता है।
World Soil Day: मिट्टी का संरक्षण मृदा दिवस का आधार
डा. संत कुमार मलिक कहते हैं कि हमारे जीवन का आधार मिट्टी है। यह केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि हमारी भोजन, जल और पर्यावरण की सुरक्षा की नींव है। हर साल पांच दिसंबर को विश्व मृदा दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य मिट्टी की रक्षा और उसके सही उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस बार विश्व मृदा दिवस की थीम स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा है। यह थीम शहरी वातावरण में मिट्टी के महत्व पर केंद्रित है। जो यह बताती है कि कैसे स्वस्थ मिट्टी खाद्य उत्पादन, जल निस्पंदन, कार्बन भंडारण और जैव विविधता को बनाए रखने में मदद करती है।

World Soil Day: मृदा कार्ड में आ रही मिट्टी की सेहत
भूमि परीक्षण अधिकारी डा. संत कुमार मलिक के अनुसार कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जींद जिला में तीन भूमि परीक्षण प्रयोगशालाएं व तीन लघु भूमि परीक्षण प्रयोगशालाएं चलाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता व रासायनिक तत्वों के साथ सेहत का पता लगाना है। मिट्टी की जांच आवश्यक है, ताकि किसान अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य, पोषक तत्वों की स्थिति और पीएच स्तर को समझ सकें।
यह जांच उर्वरक और खाद के सटीक उपयोग में मदद करती है। इससे लागत कम होती है और फसल की पैदावार बढ़ती है। इसके अलावा, मिट्टी की जांच से मिट्टी की कमी या अधिकता वाले पोषक तत्वों की पहचान करके सही फसल चुनने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला जींद में जुलाई से आइसीपी मशीन से मृदा विश्लेषण का कार्य किया जा रहा है। यह मशीन आठ तरह के रासायनिक तत्वों की जांच करती है।
जिससे किसानों को समय पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिल जाता है एवं मिट्टी की उर्वरता व रासायनिक तत्वों की मात्रा के बारे मे पता चल जाता है। इससे किसान आवश्यकता अनुसार ही मिट्टी में खाद का इस्तेमाल करके स्वस्थ फसल का उत्पादन ले सकते हैं।
World Soil Day: एक साल में मिट्टी के 27540 नमूनों की जांच
एक साल में 27540 मृदा नमूने विश्लेषण के लिए प्राप्त हुए थे। विश्लेषण के बाद संबंधित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भेजे गए थे। इस साल विभाग को 27300 मृदा नमूने प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 12600 मृदा नमूनों का विश्लेषण किया जा चुका है। जिला कृषि उप निदेशक डा. गिरिश नागपाल का कहना है कि सभी किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और नियमित रूप से अपनी खेती की मिट्टी की जांच करवाकर वैज्ञानिक ढंग से खेती अपनाएं। ताकि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके।










