Elephant Activity : हाथियों के आतंक के कारण प्रशासन को लगानी पड़ी धारा 163
15 फरवरी तक जारी रहेंगे आदेश, जान माल को होने वाले नुकसान से बचाव के लिए उठाए कदम
Elephant Activity : झारखंड में करीब 15 दिन पहले हाथियों के आतंक के बाद एक बार फिर गंभीर स्थिति बन गई है। इस बार निशाने पर है गुमला जिला। यहां हाथियों की गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ने के कारण जिलाधीश द्वारा धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। इसे लिए स्थानीय लोगों पर कई प्रकार की पाबंदियां लगाई गई है, जिससे नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
दरअसल गुमला जिले के सूपा, भरनो, बड़गांव, मोरंगा एवं महुआ टोली ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। यह सभी क्षेत्र भरनो थाना क्षेत्र के अधीन आते हैं। यहां हाथियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इसके चलते गुमला के अनुमंडल दंडाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। यह आदेश 30 जनवरी को जारी किए गए हैं और 15 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इसके चलते लोगों को कई प्रकार के प्रशासनिक प्रतिबंधों का पालन करना होगा।
जंगल से निकला 18 हाथियों का झुंड
गुमला जिला प्रशासन को सूचना मिली थी कि जंगल से 18 हाथियों का झुंड जंगल से निकला है। यह सभी हाथी
इस क्षेत्र में घूम रहे हैं। इसके कारण क्षेत्र में हाथियों की गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। अब हाथियों की आवाजाही बढ़ गई हैं। इसके कारण ग्रामीणों को जान-माल का खतरा हो सकता है। इसके चलते ही प्रशासन ने यह उपाय किया है।

नहीं होंगी जनसभा का जुलुस
जिला प्रशासन द्वारा यह आदेश जारी कर क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगा दी है, जिसमें अधिक लोगों की भीड़ एकत्रित हो। हालांकि इसमें विवाह शादियों जैसे समारोहों को अलग किया गया है। प्रशासनिक आदेशों के अनुसार इस प्रतिबंधित क्षेत्र में 5 या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस क्षेत्र में कोई भी आम सभा, जुलूस, मेला या ऐसी गतिविधि नहीं होगी, जिसमें भीड़ जुटे। यदि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है तो इसके लिए पहले प्रशासनिक अनुमति जरूरी होगी।
यह कार्य हो सकेंगे प्रतिबंध के बावजूद
हालांकि यह प्रतिबंध प्रशासन द्वारा लोगों की सुरक्षा को देखते हुए लगाया गया है। ऐसे में सरकारी कार्य अपने रूटीन में होते रहेंगे। इसके अलावा बाजार-हाट, मंदिर-मस्जिद में पूजा-अर्चना, विवाह और शव यात्रा जैसे कार्य किए जाते रहेंगे। हालांकि निषिद्ध क्षेत्र में कोई भी घातक हथियार, विस्फोटक पदार्थ या लाठी-डंडा लेकर नहीं चल सकते हैं। इस दौरान 3 से अधिक वाहनों को एक साथ नहीं चलाया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति प्रशासनिक आदेशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने आह्वान किया है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं दें। साथ ही जंगली हाथियों से स्वयं को लोग सुरक्षित रखें।
20 लोग बने थे शिकार
इससे पहले झारखंड के ही पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा क्षेत्र में हाथी ने 20 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना लिया था। इसके बाद प्रशासन ने बड़े स्तर पर बचाव कार्य चलाया था। क्योंकि बिगड़ैल हाथी की दहशत से आसपास के लोगों के साथ-साथ प्रशासन भी हलकान हो गया था। हाथी के आतंक का आलम यह था कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार को भी रांची से चाईबासा पहुंचना पड़ा। क्योंकि यह क्षेत्र भीड़ भाड़ वाला है और इसके साथ ही नक्सल प्रभावित भी।
हाथी रेस्क्यू सेंटर की योजना
लगातार हाथियों के मामले आने के बाद सरकार झारखंड में राज्य का अपना रेक्क्यू सेंटर बनाने पर विचार कर रही है। क्योंकि अभी तक इसके लिए पश्चिमी बंगाल और ओडिशा राज्यों के रेस्क्यू सेंटर का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि यह मामला आने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने स्थानीय अधिकारियों को आदेश दिए थे कि पीड़ितों को तुरंत प्रभाव से मुआवजा दिया जाए। सरकार की योजना के तहत मृतक के आश्रितों को 4 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि घायलों को 1.5 लाख रुपये दिए जाते हैं।










