Global Oil Price : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में आया उछाल 3% बढ़ी कीमत

भारतीय उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा असर

Global Oil Price : पिछले करीब 1 महीने से ईरान के साथ चल रहे अमेरिका और इजराइल के युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है। पिछले कई दिनों से विश्व भर में ऊर्जा जरूरतों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में अब यमन के ईरान-समर्थित हूतियों द्वारा मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष में शामिल होने की घोषणा की गई है। हूतियो द्वारा किए गए इस एलान से भी क्रूड मार्केट पर असर पड़ा है।

क्योंकि फिलहाल अमेरिका की सैन्य मौजूदगी के विस्तार से तेल की आपूर्ति में आने वाली दिक्कतें बढ़ सकती है। इस नए अपडेट के कारण इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार सुबह बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में काफी उछाल आया है। यह कीमतें सवा 3% बढ़ कर 116.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि कुछ समय के लिए कच्चा तेल इससे भी अधिक कीमत पर 116.75 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा था।

युद्ध लंबा चलने की आशंका का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस दिन यह युद्ध शुरू हुआ किसी को भी अंदाजा नहीं था कि 1 महीने तक चलेगा, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैँ। अमेरिका और इजराइल भी अपनी रणनीति को बदल रहे हैं। इससे विश्व भर में तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। साथ ही रूस ने भी अपना तेल नहीं देने की बात कही है। इससे क्रूड आयल की कीमतों में उछाल आना स्वाभाविक है। यह पूरी दुनिया के लिए महंगाई बढ़ाने वाला कारक बनेगा।

भारत में स्थिति सामान्य

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस संघर्ष का असर देर सवेर सभी पर पड़ना है, लेकिन फिलहाल तक भारत में स्थिति सामान्य है। बशेक देश के कई हिस्सों में पेट्रोप पंपों पर पेट्रोल समाप्त होने के समाचार आ रहे हैं, लेकिन यह अचानक अधिक मांग के कारण हुआ है। सामान्यतौर पर आपूर्ति फिलहाल जारी है।

अमेरिकी वायदा कारोबार में भी उछली कीमतें

इतना ही नहीं नए भू राजनीतिक प्रभावों का असर अमेरिकी तेल बाजार पर भी आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 2.88% का उछाल दर्ज किया गया है। इसकी कीमतें 102.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक उछाल देखा जा सकता

शिपिंग रूट को लेकर पहले भी बनी है ऐसी स्थिति

अंतरराष्ट्रीय ट्रेड पर नजर रखने वाले जे. जोगेंद्र सिंह का कहना है कि शिपिंग रूट प्रभावित होने के कारण अभी चिंता और अधिक बढ़ सकती है। क्योंकि पहले भी ऐसी स्थिति बनने पर हूतियों द्वारा जहाजों को रोका जा चुका है।

ऐसे में जल मार्ग को बाधित करने के हूतियों के पिछले कार्यों का आंकलन करने पर चिंता और अधिक बढ़ रही है। लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को भी पहले भी रोका गया था। ऐसे में अब पहले से ही होर्मुज स्‍ट्रेट बाधित चल रहा है और दूसरे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे बाब अल-मंदेब पर भी संकट बढ़ रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है बाब अल-मंदेब

दरअसल बाब अल-मंदेब भी होर्मुज स्ट्रेट की तरह ही महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य है। बाब अल-मंदेब यमन और इरिट्रिया जैसे देशों के बीच स्थित है। यह रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण जल मार्ग है। क्योंकि यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ते हुए सीधा रूट तैयार करता है। इसका महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि यह स्वेज नहर के बीच से एशिया और यूरोप के बीच विश्व का सबसे अधिक व्यस्त जल मार्ग है। विश्व भर में व्यापार के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

हूतियों के संघर्ष का असर सऊदी अरब पर भी

खाड़ी देशों का यूं तो इस युद्ध से काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन हूतियों के संघर्ष के एलान से सऊदी अबर और भी अधिक दिक्कत में है। क्योंकि लाल सागर सऊदी अरब के लिए महत्वूर्ण व्यापार मार्ग है। सऊदी अरब का यानबू निर्यात केंद्र भी लाल सागर में ही है। यह संकट बढ़ने से आशंका है कि हूतियों इस केंद्र पर हमला कर सकते हैं। ऐसे में पूरे सऊदी अरब पर भी संकट छा जाएगा।

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