Unique Squatting Competition : कैथल के गांव में अनोखी प्रतियोगिता 82 वर्षीय लक्ष्मण सिंह लगातार 10 घंटे 13 मिनट तक बैठे उकड़ू
हरियाणा में उकडू बैठो प्रतियोगिता, बुजुर्गों के आगे नहीं टिक पाए युवा
Unique Squatting Competition : देसां में देस हरियाणा जित दूध दही का खाना। यह कहावत तो आपने सुनी होगी। साथ ही हरियाणा की पहचान यहां के खेलों के लिए भी होती है। यूं तो हरियाणा में आए दिन कबड्डी, कुश्ती की प्रतियोगिताएं होती रहती हैं, जिसमें युवा अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हैं।
लेकिन पहली बार ऐसी प्रतियोगिता हुई है, जिसमें बुजुर्गों के आगे युवा टिक नहीं पाए। यह प्रतियोगिता ताकत नहीं, शरीर की स्थिरता की है। नाम है उकड़ू बैठो प्रतियोगिता। उकड़ू यानी मलासन में बैठना। जिस प्रकार भारतीय पद्धति में लोग शौच के लिए बैठते हैं, ऐसे लगातार बैठने की इस प्रतियोगिता में बुजुर्गों ने युवाओं को हरा दिया।
इस प्रतियोगिता का आयोजन कैथल जिला के कलायत क्षेत्र के गांव लांबा खेड़ी में सोमवार को किया गया। प्रतियोगिता में एक बुजुर्ग ने सबसे अधिक 10 घंटे 13 मिनट तक उकड़ू बैठ कर जीत हासिल की। यह प्रतियोगिता सोमवार दोपहर लांबा खेड़ी गांव में हुई। यहां दोपहर बाद 4:04 बजे प्रतियोगिता की शुरूआत की गई और रात 2 : 15 बजे तक लगातार चली।
10 घंटे 13 मिनट तक चली इस प्रतियोगिता में गांव के 48 लोगों ने भाग लिया। हालांकि सिर्फ 6 लोग ही अंत तक टिक पाए। मुख्य रूप से गांव के 82 वर्षीय लक्ष्मण सिंह, बलकार, सुभाष, कोका, सुरेंद्र व जगदीश को विजेता घोषित किया गया।
प्रत्येक विजेता को 8700 रुपये का इनाम
दरअसल इस प्रतियोगिता के लिए पहले 1100 रुपये को ही इनाम तय किया गया था, लेकिन सभी विजेताओं को आयोजन सिमित द्वारा 8700-8700 रुपये पुरस्कार के रूप में दिए गए। बाकी बची हुई पुरस्कार राशि 7600 रुपये प्रति विजेता का सहयोग ग्रामीणों द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता की चर्चा प्रदेश भर में है। साथ ही इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।
युवा नहीं बैठ पाए उकड़ू
दरअसल हरियाणा में बुजुर्ग आमतौर पर उकड़ू बैठते हैं। वहीं आज के युवा उकड़ू नहीं बैठ पाते। इस परंपरा को बढ़ाने के लिए ही यह प्रतियोगिता आयोजित की गई है। प्रतियोगिता के विजेता 82 वर्षीय लक्षमण सिंह के अनुसार पहले लोग आमतौर पर उकडू ही बैठते थे। इसलिए इस प्रतियोगिता में भी अधिकतर बुजुर्ग ही अंत तक टिक पाए हैं। अधिकतर युवा प्रतियोगिता से शुरूआत में ही बाहर हो गए।
महिलाओं ने भी लिया भाग
इस प्रतियोगगिता के लिए विशेष आकार के निशान बनाए गए थे। प्रतिभागी को इस घेरे में ही उकड़ू यानी मलासन में बैठना था। प्रतियोगिता की शुरूआत में 48 लोग उकड़ू बैठे और इनमें महिलाएं भी शामिल रही। हालांकि अंत तक बुजुर्ग ही टिक पाए। आयोजकों ने बताया कि पहले 2 घंटे में ही 10 से 15 प्रतिभागी थक गए और वे अपने स्थान से उठ गए। नियमा अनुसार एक बार बैठ कर हिलना या उठना भी नहीं था। एक जगह ही अधिक से अधिक देर तक बैठा रहना था।
नहीं थके बुजुर्ग
दोपहर बाद 4:04 बजे शुरू हुई प्रतियोगिता के 10 घंटे बाद भी गांव के 6 बुजुर्ग डटे रहे। हालांकि इनके लिए यहीं पर हुक्के-पानी की व्यवस्था की गई। लगातार 10 घंटे बैठने के बाद इन बुजुर्गों के हौसले को देखते हुए प्रतियोगिता समाप्त कर दी गई। 82 वर्षीय लक्ष्मण सिंह सबसे अधिक लगातार 10 घंटे 13 मिनट तक उकड़ू बैठे रहे।
प्राचीन योग पद्धति का हिस्सा
ग्रामीणों और गांव के सरपंच सोनू के अनुसार इस प्रतियोगिता का उद्देश्य भारत की प्राचीन योग पद्धति के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। गांव में सभी लोगों के सहयोग से इसका आयोजन किया गया। उकड़ू अवस्था में घुटनों को मोड़कर तलवों के बल बैठा जाता है। योग की भाषा में इसको मलासन या उत्कटासन भी कहा जाता है। इससे यह घुटनों और कूल्हों का अच्छा अभ्यास होता है। जिससे जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।










