CNG From Sugarcane Waste : भोपाल नगर निगम की अनोखी पहल, गन्ने के वेस्ट से बनाई सीएनजी
वेस्ट का होगा सुरक्षित निपटान, बाजार से सस्ती मिलेगी गैस
CNG From Sugarcane Waste : आजकल हर कोई एलपीजी की किल्लत झेल रहा है। ऐसे में देश के मध्यप्रदेश राज्य से राहत भरी खबर आई है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नगर निगम द्वारा गन्ने से निकले वाले बेस्ट यानी बचे हुए अवशेष से सीएनजी बनाने की पहल की है। यह पहले बेशक छोटे स्तर पर हुई है, लेकिन इससे आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर विशेषकर घरों में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने की बड़ी उम्मीद बंधी है।
दरअसल शहरों के लिए गन्ने से निकलने वाला यह अवशेष लोगों के लिए परेशानी बनता था, लेकिन अब इसका उचित प्रयोग करने की विधि भोपाल नगर निगम ने अपना ली है। इसके तहत गन्ने के इस अवशेष से सीएनजी बनाई जाएगी। यह सीएनजी बाजार से सस्ती तो मिलेगी ही, साथ ही सड़कों पर पड़ रहने वाला यह कचरा भी समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यह प्रयोग ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ स्वच्छता में भी बहुत बड़ा कारक सिद्ध होने वाला है। इसको लेकर निगम द्वारा किया गया ट्रायल सफल रहा है।
निजी प्लांट में हुआ ट्रायल
निगम अधिकारियों के अनुसार गन्ने के वेस्ट यानी अवशेषों से सीएनजी बनाने का यह ट्रायल एक निजी प्लांट में किया गया है। इससे यह गणित भी पता चला है कि इससे बनने वाली सीएनजी बाजार में मिलने वाली गैस से कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेगा।
इससे निगम की आय तो बढ़ेगी ही, साथ में लोगों को पर्याप्त मात्रा में गैस भी मिल सकेगी। क्योंकि भोपाल शहर में करीब 2000 लोग गर्मियों गन्ने का जूस निकालने का कारोबार करते हैं। इससे प्रतिदिन करीब 20 टन अवशेष निकलते हैं।
पहले खाद बनाने में होता था प्रयोग
दरअसल गन्ने की पेराई कर जूस निकालने वाली इन छोटी मशीनों से निकलने वाले अवशेष से पहले खाद बनाया जाता था। इसको एक जगह पर एकत्रित किया जाता था। इसको पूरी तरह से खाद में बदलने के लिए करीब 50 दिन लग जाते थे। अब यह प्रक्रिया जल्दी होगी।
क्योंकि इसके लिए निर्धारित कलेक्शन सेंटर से उठा कर सीएनजी प्लांट तक ले जाने का काम भी एक एजेंसी कर रही है। अभी अवशेष की मात्रा कुछ कम है, लेकिन जल्द ही करीब 20 टन पूरे अवशेष सीएनजी प्लांट तक पहुंचने की व्यवस्था की जा रही है।
800 किलोग्राम सीएनजी बनाने की क्षमता
नगर निगम के अधिकरियों की मानें तो यह परियोजना काफी अच्छी रहेगी। क्योंकि 100 टन गन्ने के अवशेष से करीब 4000 किलोग्राम सीएनजी तैयार की जा सकेगी। ऐसे में निगम को प्रतिदिन मिल रहे 20 टन अवशेष से 800 किलोग्राम सीएनजी बनाई जा सकेगी।
यह नगर निगम की खपत का 65 प्रतिशत होगा। क्योंकि नगर निगम द्वारा अपनी 275 गाड़ियों में प्रतिदिन करीब 1200 किलोग्राम सीएनजी डलवानी पड़ती है। अभी अच्छी बात यह है कि ट्रायल के दौरान इस कचरे से गैस बनाने में सफलता मिल गई है। इसको प्रोसेस करने वाली कंपनी ने इसको बाजार से सस्ते रेट में उपलब्ध करवाने के लिए अपना प्रस्ताव दिया है।
जूस विक्रेताओं को करनी होगी अलग व्यवस्था
दरअसल यह अवशेष जूस विक्रेताओं के लिए भी सिरदर्द बना रहता है। क्योंकि इसको फेंकना पड़ता है। अब इन विक्रेताओं को एक खास व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए निगम अधिकारी जारूकता अभियान भी चला रहे हैं। इसके तहत गन्ने का जूस बनने के बाद जो वेस्ट निकलता है, उसको अलग से संभाल कर रखने की व्यवस्था करने के लिए कहा जा रहा है।
फिलहाल इसको नगर निगम की गाड़ी सीएनजी प्लांट तक पहुंच रही है। जल्द ही निजी एजेंसी यह काम करेगी। ऐसे में जब भी इसकी गाड़ी आएगी, जूस विक्रेता यह अवशेष उस गाड़ी को दे सकेंगे। इसको प्लांट पर पहुंचा कर सीएनजी बनाने की प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में गन्ने के जूस के साथ-साथ अब इसका बचा हुआ भूसा या अवशेष भी काम आ सकेगा।










