Haryana livestock vaccination: हरियाणा में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए 1 महीने तक चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान
पूरे प्रदेश में पशुओं को मुंह-खुर रोग एवं गलघोटू रोग से बचाव के लिए संयुक्त टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। विशेषकर बारिश के मौसम में पशुओं में इस प्रकार की दिक्कत आती हैं। दोनों ही बीमारियां पशुओं के लिए जानलेवा हो सकती हैं। ऐसे में पशु पालन विभाग ने आह्वान किया है कि सभी पशुओं को टीका जरूर लगवाएं
Haryana livestock vaccination: सफीदों, हरियाणा : हरियाणा प्रदेश के पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है। पशुओं को मुंह-खुर और गलघोटू जैसी बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालन विभाग द्वारा मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 11 मई 2026 से शुरू होगा और 11 जून 2026 तक 1 महीने तक चलेगा। इस दौरान पशुपालन विभाग के चिकित्सक घर-घर जाकर पशुओं को टीका लगाएंगे।
सफीदों के उपमंडल अधिकारी पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. सुरेंद्र आर्य के अनुसार विभाग द्वारा पशुओं को मुंह-खुर रोग एवं गलघोटू रोग जैसी गंभीर एवं संक्रमित बीमारियों से बचने के उद्देश्य से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। पशु सुरक्षा चक्र अभियान 11 मई से 11 जून तक चलेगा। इसके अंतर्गत जिला जींद में सभी पशुओं का टीकाकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं को रोगों से बचाकर पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाना तथा जिले में स्वस्थ पशुधन का विकास सुनिश्चित करना है।
प्रत्येक पशु का टीकाकरण सुनिश्चित
डॉ. सुरेंद्र आर्य ने जानकारी देते हुए बताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा बनाई गई विशेष टीम के अधिकारी / कर्मचारी सभी गांवों में घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण करेंगे ताकि कोई भी पशु टीकाकरण से वंचित न रहे। हरियाणा राज्य उन राज्यों में शामिल है, जहां मुंह-खुर रोग एवं गलघोटू रोग के लिए संयुक्त वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत एक ही बार में दोनों रोगों से सुरक्षा हो जाती है। पशु को बार-बार होने वाले तनाव से भी राहत मिलती है।
टीकाकरण को लेकर पूछे जाने वाले प्रश्न : क्या दूध सूख जाता है
अकसर लोगों के बीच में यह भ्रम रहता है कि टीक लगने के बाद दुधारु पशुओं का दूध सूख जाता है। हालांकि इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि टीक लगने के कारण पशु तनाव में आता है। इसका असर 1 दिन दूध पर हो सकता है, लेकिन यह पशु को जानलेवा बीमारियों से बचाता है। ऐसे में पशुओं को हर हाल में टीका लगवाना चाहिए। यह पूरी तरह से सुरक्षित हाेता है।
टीकाकरण के लिए होगी टैगिंग
विभाग द्वारा किए जा रहे टीकाकरण के तहत पशुओं की टैगिंग अनिवार्य होगी। विभाग के अधिकारी -कर्मचारी प्रत्येक पशु का पंजीकरण करेंगे और पंजीकरण करने के तुरंत बाद उसका रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि किस पशु का टीका लगा है। साथ ही इस पशु की जानकारी भी ऑनइालन दर्ज हो जाएगी।

चिकित्सकों का सहयोग करें पशु पालक
उप मंडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र आर्य ने पशुपालकों से अपील की कि वे विभाग के टीमों का सहयोग करें तथा अपने सभी पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाएं। इससे पशुओं का सुरक्षा घेरा मजबूत होगा। किसी भी पशु का टीकाकरण करवाने के लिए मना नहीं करें बल्कि विभाग की टीम द्वारा दिए गए निर्देश अनुसार अपने सभी पशुओं का टीकाकरण करवाना सुनिश्चित करें।
क्या होता है मुंह खुर पका रोग
यह बीमारी पशुओं में अकसर मानसून मौसम में होती है। यह बीमारी गाय, भैंस, भेड़, बकरियों में बहुत ही अधिक संक्रामक और विषाणु जनित होती है। इसमें पशु के मुंह और पैरों यानी खुर में छाले हो जाते हैं। पशु को तेज बुखार आता है। ऐसे में पशु न तो चारा खाता है और न ही चल पाता है। इससे बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। यदि ऐसी बीमारी पशु में आ जाती है तो तुरंत पशु चिकित्सक को दिखाएं। पशु के बाड़े में पूरी सफाई व स्वच्छता रखनी चाहिए।
क्या है गलघोटू बीमारी लक्षण और बचाव
गलघोटू बीमारी भी पशुओं के लिए जानलेवा होती है। यह बीमारी भी मानसून के मौसम में अधिक अटैक करती है।
इसके संक्रमण से पशु की मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी पास्चुरेला मल्टोसिडा नामक जीवाणु के कारण होती है। ऐसे में संक्रमण के कारण पशु के सांस की ऊपर वाली नली को प्रभावित करता है और सांस लेने में दिक्कत होती है।
पशु को तेज बुखार होता है। संक्रमित पशु की आंखें भी लाल रहती हैं। पशु की नाक भी बहती है और पशु बेचैन रहता है। ऐसी स्थिति में बिना कोई भी समय गवाएं पशु का इलाज करवाया जाना चाहिए। हालांकि टीकाकरण इसका सबसे बेहतरीन बचाव है।










