Sugar : चीनी का सच क्याें स्वास्थ्य के लिए मीठा जहर मानते हैं विशेषज्ञ

आज के समय में चीनी हर घर का मुख्य खाद्य पदार्थ बन गई है। इसकी शुरूआत सुबह की चाय से लेकर दिन में शेक और रात को डेजरट तक में होता है। हर जगह यही चर्चा रहती है कि चीनी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। आइए जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई।

Sugar : आज के समय में डायबिटीज बहुत बड़ी बीमारी का रूप ले चुकी है। ऐसे में जहां भी बैठते हैं एक ही बात की चर्चा मिलती है कि चीनी छोड़ दो। विशेषकर हरियाणा व उत्तर प्रदेश में चीनी बहुत ही अधिक मात्रा में प्रयोग की जाती है। हालांकि कुछ समय पहले की बात की जाए तो लोग मीठे के रूप में गुड़ या देसी खांड का प्रयोग करते थे। आज फिर से वही प्रचलन बढ़ रहा है।

चीनी व गुड़ दोनों ही गन्ने से बनते हैं, लेकिन विशेषज्ञ भी चीनी की बजाय इन उत्पादों का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं चीनी की सच्चाई। चीनी शरीर के लिए जरूरी है या हानिकारक। क्योंकि तमाम शोध और चिकित्सीय सलाहों के बावजूद हरियाणा व उत्तर प्रदेश में चीनी की खपत बहुत अधिक है।

क्या सेहत की दुश्मन है चीनी

जहां भी सेहत की बात आती है, चीनी को छोड़ने की सलाह रहती है। यहां तक कि आजकल बाजार में मिठाई भी गुड़ से निर्मित आने लगी हैं। या अपने उत्पादों में चीनी की बजाय दूसरे मीठे उत्पाद होने का प्रचार खासतौर पर किया जाता है। चीनी को लेकर लोगों के बीच काफी मतभेद रहते हैं। हालांकि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि चीनी का प्रयोग शारीरिक श्रम और क्रियाशीलता के आधार पर ही तय हो सकता है कि यह सेहत के लिए कितनी सही है।

कभी रईसों की पहुंच में रही आज उन्हीं की रसोई से निकली

चीनी को लेकर आज भले ही तरह- तरह की बात हो रही हैं, लेकिन एक जमाने में चीनी की पहुंच सिर्फ रईस लोगों की ही होती थी। रोहतक के सेक्टर 1 निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग वेदप्रकाश बताते हैं कि मीठे के रूप में अपने कोहलू में निर्मित शक्कर, गुड़ और खांड ही प्रयोग होते थे। तब चीनी कुछ खास ही परिवारों की पहुंच में थी। यहां तक की गांव में चर्चा भी चलती थी कि फलां के घर में चीनी की चाय बनती है। वहीं आज इसका उल्टा हो गया है। आज रईस लोग चीनी को छोड़ कर गुड़ या खांड पर आ गए हैं।

चीनी शरीर में कैसे करती है काम

ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ सीधे तौर पर चीनी से ही मीठा ले रहे हैं। दरअसल मीठा यानी कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर में विशेष ईंधन के रूप में काम करता है। इसके अलाव खाने में शामिल अन्य चीजें गेहूं, चावल, आलू में भी चीनी का कंटेंट होता है। यानी इनमें कार्बोहाइड्रेट होता है। इसको वैज्ञानिक भाषा में जटिल कार्बोहाइड्रेट के नाम से जाना जाता है। क्योंकि इन पदार्थों से निकलने वाली चीनी को शरीर तोड़ कर ग्लूकोज का निर्माण करता है। यही वह पदार्थ है, जो मानव शरीर और दिमाग को ऊर्जा देने का काम करता है।

भारत में चीनी का इतिहास

हालांकि चीनी के इतिहास को लेकर काफी असमंजस है। कुछ लोग चीनी नाम होने के कारण इसको मुख्य रूप से चीन से आया हुआ उत्पाद बताते हैं, वहीं कुछ लोग भारत में चीनी का निर्माण बताते हैं। क्योंकि गन्ने के पेराई कर भारत में गुड़, शक्कर, खांड जैसे उत्पाद बनाने की तकनीक बहुत पुरानी है। और अधिक पीछे जाएं तो चरकसंहिता में भी गन्ने के औषधीय गुणों के बारे में बताते हुए इससे 5 प्रकार के उत्पाद बनने का जिक्र आता है।

चीनी के नुकसान को लेकर क्या है शोधकर्ताओं की राय

बीबीसी की एक रिपोर्ट में चीनी को लेकर हुए शोध के बारे में बताया गया है कि यदि प्रतिदिन कोई व्यक्ति 150 ग्राम से ज्यादा फ्रक्टोज को कंज्यूम करता है तो इससे मानव शरीर इंसुलिन हार्मोन के असर को कम करने लगता है। फिर शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और रक्तचाप प्रभावित होता है।

इसके कारण ही दिल की बीमारियां भी सामने आती हैं। वहीं स्विट्जरलैंड स्थिति लुसान यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर ल्यूक टैपी ने अपने शोध में कहा है कि दिली की बीमारी, डायबिटीज और मोटापा शरीर में प्रयोग से अधिक कैलोरी लेने से होता है।

तो चीनी को लेकर क्या फैसला लें

विभिन्न शोध और प्रयोग में यह तो साफ हो चुका है कि कोई भी खाद्यान प्रयोग करना इतना नुकसानदायक नहीं है, जितना इसकी मात्रा। चूंकि शरीर का पूरा सिस्टम ही कैलोरी पर चलता है, ऐसे में इसको संतुलित करने की जरूरत है। रोहतक निवासी पोषण विशेषज्ञ रेशन कोहली के अनुसार किसी भी चीज को पूरी तरह से त्यागना कोई बहुत अच्छी आदत नहीं है।

विशेषकर जब उसका कोई नुकसान शरीर में न हीं है। हां यह सही है कि हमें संतुलित डाइट लेनी चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से शरीरिक श्रम भी बहुत जरूरी है। इसके अलावा चीनी या कार्बोहाइड्रेट के सभी माध्यमों की जानकारी लें। यह सुनिश्चित करें कि जो भी कैलोरी आप ले रहे हैं, इसमें ऊपर से मिलाई गई चीनी यानी कृत्रिम मिठास से आपके शरीर में 5 कैलोरी से अधिक नहीं जाएं।

फिर क्या बचा है रास्ता

जींद के वरिष्ठ चिकित्सक डा. राजेश कुमार बताते हैं कि गड़बड़ खाने में नहीं है, जीवनशैली में हैं। 2 बातों में संतुलन की जरूरत है। कैलोरी लेने और इसको खर्च करने में। यही हर किसी को बना कर रखना चाहिए। चूंकि आज के जीवन में हर कोई अरामदायक जीवन चाहता है। ऐसे में चीनी नहीं कोई भी कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तु संयमित होकर लें। नियमित रूप से शारीरिक परिश्रम करें। सुबह व शाम के समय पसीना निकालें। खाने में फाइबरयुक्त वस्तुओं को बढ़ाएं। इसके साथ नियमित रूप से चीनी से निर्मित मिठाई और चाय ली जा सकती है।

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