Milk Production : …ताकि गर्मी में पशुओं का दूध नहीं हो कम, ऐसे करें उपाय
दूध उत्पादन पर भी गर्मी की मार, घट रहा उत्पादन 10 प्रतिशत तक आई कमी, बेहतर देखभाल कर बढ़ाएं उत्पादन
milk production : भीषण गर्मी का असर जिस प्रकार लोगों पर आ रहा है, उसी प्रकार पशुओं पर भी देखा जा रहा है। क्योंकि गर्मी के कारण पशुओं में दूध सूख रहा है। जींद वीटा प्लांट में बुधवार को 1 लाख 10 हजार लीटर दूध की आपूर्ति हुई है। जबकि सर्दियों में 3 लाख लीटर तक दूध आता है।
हिसार /जींद : गर्मी बढ़ने का असर हर किसी पर दिख रहा है। यहां तक दुधारू पशुओं का दूध भी गर्मी के कारण सूखने लगा है। हालांकि इस मौसम में पशुओं की बेहतर देखभाल कर दूध की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। क्योंकि गर्मी पशुओं को परेशान करती है। लोग अपने लिए तो गर्मी से बचाव का प्रबंध कर लेते हैं, लेकिन पशुओं की ओर ध्यान नहीं देते।
हरियाणा के सफीदों में पशुपालन विभाग के उप निदेशक डा. सुरेंद्र आर्य के अनुसार पशुओं की देखभाल यूं तो हर मौसम में ही बहुत विशेष होती है, लेकिन गर्मी में दूध के उत्पादन पर बहुत अधिक असर पड़ता है। ऐसे में पशुपालकों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि पशुओं को गर्मी से बचाया जा सके। इसके लिए छोटे-छोटे बदलाव ही काफी होते हैं।
गर्मियों में क्यों घटता है दूध उत्पादन
डा. सुरेंद्र आर्य बताते हैं कि गर्मी के मौसम में इंसानों की तरह ही पशुओं को भी हीट स्ट्रेस होता है। इसके अलावा दूध घटाने का मुख्य कारण है डिहाइड्रेशन। इंसान को जब भी प्यास लगती है, वह पानी पी लेता है, लेकिन पशु तभी पानी पीता है, जब उसको दिया जाता है। साथ ही पशुओं को पानी पिलाने की व्यवस्था भी ऐसी होती है कि उसमें पानी बहुत अधिक गर्म हो जाता है। इसलिए पशुओं के लिए पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। विशेषकर दुधारू पशुओं को दिन में कम से कम 4 बार पानी जरूर पिलाएं।
गर्मी में पशुओं के बाड़े में करें खास प्रबंध
गर्मी के मौसम में पशुओं का बाड़ा भी ऐसा होना चाहिए, ताकि वहां सीधी लू नहीं जाएं। छाया होने के साथ-साथ गर्म हवाओं से बचाव का प ्रबंध भी किसान और पशु पालकों को करना चाहिए। हालांकि पशु बाड़ा हवादार होना चाहिए। यदी खुले में पेड़ों के नीचे पशुओं को बांधा जा रहा है तो यहां घनी छांव होनी चाहिए, ताकि लू से बचाव हो सके। फिलहाल जिस प्रकार मौसम चल रहा है पशु बाड़े में कूलर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
यह भी पढ़ें : हरियाणा में वीटा दूध हुआ महंगा, फुल क्रीम से A2 मिल्क तक बढ़े दाम, देखें वीटा की नई प्राइस लिस्ट
पशुओं के आहार का रखें ध्यान
इस मौसम में आमतौर पर हरा चारा कम हो जाता है। वहीं सूखा चारा और अधिक गर्मी दुधारू पशुओं में डिहाइड्रेशन करते हैं। इससे बचाव के लिए पानी के साथ हरा चार महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि हरे चारे में भी पानी अधिक होता है। इसके साथ ही संतुलित आहार भी पशुओं में दूध की मात्रा बनाए रखने के लिए जरूरी है।
डा. सुरेंद्र आर्य के अनुसार पशु को लगातार चारा नहीं देना चाहिए। दिन पशु को आराम करने का समय दें। इसके साथ ही नियमित रूप से खनिज लवण यानी मिनरल मिक्सचर की खुराक भी देते रहें। इससे न सिर्फ दूध की मात्रा सही रहती है, वहीं पशु स्वस्थ भी रहता है।
सामान्य पानी पिलाएं
डा. आर्य के अनुसार पशुओं को सामान्य यानी ऐसा पानी पिलाना चाहिए, जो न तो ठंडा हो और न ही गर्म। इसके लिए पहले से ही पेड़ों के नीचे या छत के नीचे ड्राम भर कर रखा जा सकता है। इसमें पशु अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीता रहता है। सुबह व शाम के समय पशुओं को तालाब में जरूर लेकर जाएं। विशेषकर भैंस को पानी में रखने की अधिक जरूरत हाेती है। इससे पशु खुश भी होता है।यदि बोर की व्यवस्था है तो ताजा पानी सबसे उपयुक्त है।
सर्दी के मुकाबले आधे से भी कम पहुंच रहा दूध
जींद वीटा प्लांट के सीईओ नरेंद्र धानिया के अनुसार गर्मियों में दूध की कमी होना सामान्य बात है। फिलहाल जींद वीटा प्लांट में प्रतिदिन करीब 1 लाख 10 हजार लीटर तक दूध पहुंच रहा है। अगले महीने तक दूध की मात्रा और भी घट जाती है। दूध की आपूर्ति 70 हजार लीटर तक भी चली जाती है। हालांकि सर्दियों में प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध भी वीटा प्लांट में पहुंचा है। इसका मुख्य कारण इस सीजन में दूध का उत्पादन कम होना होता है। इस समय में दुधारू पशुओं की संख्या और दूध की मात्रा दोनों में कमी आती है।










