Haryana news : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब नहीं देनी होगी VIP नंबर की कीमत, वाहन मालिकों को दी राहत
हरियाणा डायरी, चंडीगढ़।
Haryana news : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुराने और पसंदीदा वाहन नंबरों को नई गाड़ियों पर भी जारी रखने वाले हजारों वाहन मालिकों के लिए राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार के फैसले को पलटते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई वाहन मालिक अपने पुराने वाहन का नंबर नई गाड़ी पर ट्रांसफर करवाना चाहता है, तो उससे केवल नंबर बदलने के नाम पर अतिरिक्त शुल्क या वीआईपी नंबर फीस नहीं वसूली जा सकती।
यह फैसला उन मामलों में आया, जिनमें वाहन मालिकों ने हरियाणा सरकार द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत पुरानी सीरीज के नंबरों को नई सीरीज में स्थानांतरित करने पर प्रेफरेंशियल (पसंदीदा) नंबर शुल्क लिया जा रहा था। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना और सरकार का आदेश निरस्त कर दिया।
Haryana news : मामले की सुनवाई में ये बात आई सामने
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि वाहन पंजीकरण चिह्नों (Registration Marks) की वैधता, नवीनीकरण और उनसे जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार इस विषय में स्वतंत्र रूप से कोई नया नियम या शुल्क लागू नहीं कर सकती। अदालत ने माना कि हरियाणा सरकार ने केवल प्रशासनिक निर्देशों और सर्कुलरों के आधार पर ऐसी व्यवस्था लागू करने की कोशिश की थी, जबकि इसके लिए कानूनी अधिकार उपलब्ध नहीं थे।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 लागू होने से पहले जारी हुए कई वाहन नंबर पुराने प्रारूप में हैं। ऐसे वाहन मालिक वर्षों से अपने पसंदीदा नंबरों का उपयोग कर रहे हैं और नई गाड़ी खरीदने पर भी वही नंबर रखना चाहते हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकार पहले कई बार अदालत में यह आश्वासन दे चुकी थी कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना अतिरिक्त शुल्क के बदला जाएगा, लेकिन बाद में 8 नवंबर 2019 को जारी आदेश के जरिए फीस वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
Haryana news : हजारों वाहन चालकों को होगा फायदा
जस्टिस जसमीत सिंह बसरा की अदालत ने 14 से अधिक याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए कहा कि वाहन मालिकों को अपने पुराने नंबर नई गाड़ी पर स्थानांतरित करने का अधिकार है और इसके लिए किसी प्रकार की अतिरिक्त वीआईपी या पसंदीदा नंबर फीस नहीं लगाई जा सकती।
इस फैसले को वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब ऐसे हजारों लोग, जो वर्षों पुराने और पहचान बन चुके वाहन नंबरों को नई गाड़ियों पर जारी रखना चाहते हैं, उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही यह निर्णय राज्यों की सीमित शक्तियों और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र को भी स्पष्ट करता है।










