Power Bank city : हरियाणा का पहला ‘बिजली बैंक’ बनेगा पानीपत, 500 मेगावाट ऊर्जा की होगी स्टोरेज
हरियाणा डायरी, चंडीगढ़।
हरियाणा के ऊर्जा क्षेत्र में एक (Power Bank city) बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पानीपत थर्मल पावर स्टेशन परिसर में 500 मेगावाट क्षमता का अत्याधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किया जाएगा। करीब 600 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना प्रदेश में बिजली प्रबंधन की तस्वीर बदल सकती है।
इसके जरिए जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी और पीक डिमांड के दौरान बिजली कटौती की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जिसमें कम मांग के समय सस्ती बिजली को बैटरियों में स्टोर किया जाता है। बाद में जब बिजली की मांग बढ़ती है या ग्रिड पर दबाव आता है, तब यही स्टोर की गई ऊर्जा वापस सप्लाई की जाती है। इससे बिजली व्यवस्था अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनती है।
Power Bank city : उत्तर हरियाणा को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
यह परियोजना विशेष रूप से उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निगम जरूरत पड़ने पर इस स्टोरेज सिस्टम से बिजली प्राप्त कर सकेगा। इससे गर्मियों और अन्य उच्च मांग वाले मौसम में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जानकारी के अनुसार पानीपत थर्मल स्टेशन में करीब 15 एकड़ भूमि पर यह प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है और अगले दो महीनों में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। लक्ष्य है कि इसे लगभग डेढ़ वर्ष में पूरा कर लिया जाए।
Power Bank city : स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट मॉडल पर होगा संचालन
यह पूरा सिस्टम आधुनिक स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट मॉडल पर आधारित होगा। जब बिजली की मांग कम होगी तब बैटरियों को चार्ज किया जाएगा और मांग बढ़ने पर इन्हें डिस्चार्ज कर बिजली ग्रिड को सपोर्ट दिया जाएगा। इससे महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम होगी और वितरण कंपनियों का वित्तीय बोझ भी घटेगा।
हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित 800 मेगावाट FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) परियोजना को भी इस स्टोरेज सिस्टम का लाभ मिलेगा। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने में यह तकनीक अहम भूमिका निभाएगी।
Power Bank city : चार अतिरिक्त बैटरियां भी होंगी स्थापित
मुख्य 500 मेगावाट स्टोरेज सिस्टम के अलावा लगभग 20 मेगावाट प्रति घंटा क्षमता की चार अतिरिक्त बैटरियां लगाने की भी योजना है। इनका उपयोग ग्रिड स्थिरता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल बिजली स्टोर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा की ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और भविष्य की स्मार्ट ग्रिड व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम है। परियोजना पूरी होने के बाद पानीपत प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों में शामिल हो जाएगा और हरियाणा को बिजली प्रबंधन में नई ताकत मिलेगी।










