Dr Sushila Jangra Jind : नेपाल में सम्मानित हुई जींद की साहित्यकार डा. सुशीला जांगड़ा
काठमांडू में भारत-नेपाल साहित्य महोत्सव के दौरान मिला सम्मान
Dr Sushila Jangra Jind : हरियाणा के जींद निवासी डा. सुशीला जांगड़ा को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित तीन दिवसीय भारत-नेपाल साहित्य कर महोत्सव के दौरान विशेषतौर पर सम्मानित किया गया। हालांकि इसमें हरियाणा के एक अन्य साहित्यकार भी शामिल रहे। इस सम्मेलन में हरियाणा के साहित्यकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान का गौरव मिला।
यह आयोजन नेपाल हिंदी साहित्यकार अकादमी और क्रांति धरा साहित्य संस्था मेरठ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजि किया गया। इसमें भारत और नेपाल के सैकड़ों साहित्यकारों ने भाग लिया। साहित्य के प्रति समर्पण को देखते हुए जींद निवासी डा. सुशीला जांगड़ा को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने किया उद्घाटन
यह आयोजन इन लिए भी महत्वपूर्ण रहा कि इसका शुभारंभ नेपाल में वहां के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने साहित्य की भूमिका पर खास जोर दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। साथ ऐसे आयोजन दोनों देशों के सांस्कृतिक और साहित्यिक संबंधों को एक नई ऊंचाई तक लेकर जाएंगे। साथ ही संबंधों को मजबूती भी मिलेगी।
नेपाल में गूंजी मां भारती की वंदना
कार्यक्रम के दौरान डा. सुशीला जांगड़ा ने मां भारती की वंदना की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं कार्यक्रम के दूसरे सत्र के दौरान कवि सम्मेलन का आयोजन भी हुआ। इस दौरान डा. सुशीला जांगड़ा ने शुद्ध हरियाणवी रचना रांडे का ब्याह का वाचन किया।
इस प्रस्तुति ने वहां पर खूब तालियां बटोरी। साथ ही कार्यक्रम के दौरान डा. जांगड़ा की नवीनतम कृति प्रकाश बिंदु का विमोचन भी हुआ। पुस्तक का विमोचन भी नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल द्वारा किया गया।
जानें डा. सुशीला जांगड़ा के बारे में
हरियाणा के जींद निवासी डा. सुशीला जांगड़ा साधारण परिवार से निकली मंजी हुई साहित्यकार हैं। हरियाणा के महिला एंव बाल विकास विभाग में वे परियोजना अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनका जुड़ाव बहुत ही गहरा है और वे म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन में राष्ट्रीय महिला प्रमुख के पद को सुशोभित कर रही हैं।
इसके अलावा हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था में संयोजक के रूप में कार्य कर रही हैं। संस्कार भारती व सर्व कल्याण मंच जैसी संस्थाओं की सदस्यता होने के साथ वे सामाजिक कार्यों में भी हमेशा आगे रहती हैं।
80 से अधिक मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं डा. सुशीला
डा. सुशीला जांगड़ा अपनी साहित्य साधना के चलते 80 से अधिक मंचों पर सम्मानित हो चुकी हैं। जींद के वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र अत्री के अनुसार उनको डाक्टर लाल चंद भल्ला, स्मृति साहित्य सम्मान,रामप्यारी वर्मा स्मृति, साहित्य सम्मान, काव्य सारथी सम्मान काव्य गौरव सम्मान, हिंदी साहित्य भूषण सम्मान, काव्य प्रभा रत्न सम्मान, काव्य शिरोमणि सम्मानए काव्य भारती सम्मान, निर्मला स्मृति, हरियाणा गौरव साहित्य सम्मान, मातुश्री विद्या देवी स्मृति साहित्य सम्मान, काव्य सौंदर्य सम्मान, काव्य श्रीसम्मान, नारी गौरव सम्मान, प्रज्ञा वैश्विक साहित्य गौरवसम्मान, प्रज्ञा साहित्य सृजन सम्मान जैसे सम्मान मिल चुके हैं।
डा. जांगड़ा की प्रकाशित पुस्तकें
उनकी प्रकाशित पुस्तकों की सूची भी लंबी है। अपने पारिवारिक और व्यवसायिक कार्यों के बीच तालमेल बैठाते हुए उन्होंने साहित्य साधना जारी रखी। उनकी रचना गीत सरिता जनवरी 2021 में प्रकािशत हुई। इसको समदर्शी प्रकाशन मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित किया गया।
2021 में ही लोक झंकार पुस्तक समदर्शी प्रकाशन मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकाशित की गई। 2024 में लोक रस्मियां पुस्तक का प्रकाशन निर्मला प्रकाशन चरखी दादरी हरियाणा से हुआ। शब्द रश्मियां का प्रकाशन 2025 में निर्मला प्रकाशन चरखी दादरी हरियाणा से हुआ। प्रकाश बिंदु 2026 में निर्मला प्रकाशन चरखी दादरी हरियाणा द्वारा प्रकाशित की गई। रसिक लहरें का प्रकाशन 2026 निर्मला प्रकाशन द्वारा किया गया।










