First Hydrogen Train : हरियाणा से होगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरूआत, मंजूरी मिली तारीख तय करना बाकी

केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, देश में चलेगी पहली 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन

First Hydrogen Train :  लगातार हो रहे बदलावों के बीच भारतीय रेल एक नया इतिहास रचने जा रही है। क्योंकि अब जींद से देश के पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जानी है। इसकी सभी तैयारी हो चुकी है। कोयला, डीजल, इलेक्ट्रिक और सीएनजी के बाद अब हाइड्रोजन से ट्रेन चलाने का रास्ता साफ हो गया है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब रेलवे द्वारा ट्रेन के संचालन की औपचारिक तारीख तय करना बाकी रह गया है।

क्योंकि रेलवे बोर्ड द्वारा इस परियोजना को हरी झंडी दे दी गई है। ऐसे में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी केंद्र सरकार का आभार जताया है। क्योंकि स्वच्छ ईंधन से चलने वाली यह ट्रेन देश के सार्वजनिक परिवहन सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

इस रूट पर चलनी है पहली हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए यूं तो पिछले करीब 4 साल से तैयारी क जा रही है। क्योंकि इसके लिए हरियाणा के जींद जंक्शन पर विशाला हाइड्रोजन प्लांट बनाया गया है। वहीं पिछले 5 महीने हाइड्रोजन ट्रेन जींद जंक्शन पर आई हुई है और लगातार सुरक्षा जांच की जा रही हैं।

इस ट्रेन को जींद जंक्शन से हरियाणा के सोनीपत तक चलाने की योजना है। इस रूट पर भी ट्रेन सुरक्षा के लिए कई बार दौड़ाया गया है। ऐसे में अब रेलवे द्वारा सिर्फ इसके संचालन की तारीख करने भर की देरी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे।

75 की स्पीड से चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

हालांकि हाइड्रोजन ट्रेन की स्पीड को लेकर शुरूआत में चर्चा चली कि यह ट्रेन करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलेगी, लेकिन जींद-सोनीपत रेलवे ट्रैक की सीमाओं को देखते हुए इसकी गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। हालांकि इससे अधिक गति से चलने में सक्षम है। हाइड्रोजन गैस को फ्यूल के रूप में प्रयोग करते हुए ट्रेन 1200 किलोवाट बिजली पैदा करेगी और इससे ट्रेन को चलाया जाएगा।

क्यों खास है हाइड्रोजन ट्रेन

दरअसल आज जिस प्रकार से पेट्रोल- डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके अलावा हरियाणा और दिल्ली में प्रदूषण अपने आप में बड़ा मुद्दा रहता है। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन से शून्य प्रदूषण होगा। धुएं की बजाय इससे सिर्फ भांप निकलेंगी। इस ट्रेन को चलाने के लिए पिछले काफी समय समय से रेल का अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) तैयारी कर रहा था और संगठन द्वारा मंजूरी दी दी गई है।

दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होगा भारत

दरअसल हाइड्रोजन ट्रेन अभी भी दुनिया के कुछ ही देशों में चलती हैं। ऐसे में भारत विश्व के उन गिने चुने देशों में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन ट्रेन चल रही है। अभी तक चीन, जापान, जर्मनी, और अमेरिका जैसे कुछ देश इस तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं।

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भविष्य की नई राह

दरअसल इस ट्रेन से भविष्य की नई राहत भी खुल जाएगी। क्योंकि इसके बाद देश के अलग-अलग रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का परिचालन संभव हो सकेगा। इसके लिए रेलवे द्वारा योजना बनाई जाएगी। फिलहाल रेलवे द्वारा देश में रिफिलिंग स्टेशन भी जींद जंक्शन पर ही बनाया गया है। यहां 1 ट्रेन को चलाने के लिए हाइड्रोजन गैस पानी से बनाई जाएगी।

800 यात्रियों की क्षमता

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में एक साथ 800 यात्रियों की क्षमता है। क्योंकि 10 कोच वाली इस ट्रेन में 2 कोच पावर को होंगे ओर 8 कोच यात्रियों के लिए रहेंगे। प्रत्येक कोच में 100 यात्रियों के लिए व्यवस्था है। ट्रेन को एक बार रिफिल कर बिना रोके 360 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। अब रेलवे द्वारा इस ट्रेन के संचालन की अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यानी जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन का सपना साकार होने वाला है।

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