PPP Update : हरियाणा में फर्जी आय दिखाने वालों की अब खैर नहीं, ग्राम सभा करेगी सत्यापन
हरियाणा डायरी, चंडीगढ़।
Haryana PPP Update : हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान पत्र (PPP) की व्यवस्था को और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब नागरिक संसाधन सूचना विभाग (CRID) गांव स्तर पर लोगों की आय का सत्यापन ग्राम सभाओं के माध्यम से करवाएगा। इसका उद्देश्य उन परिवारों की सही पहचान करना है, जो वास्तव में सरकारी योजनाओं के पात्र हैं और फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों पर रोक लगाना है।
बता दें कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में विभाग के कार्यों, परिवार पहचान पत्र से जुड़ी शिकायतों और योजनाओं के लाभ वितरण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण स्तर पर आय सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाए, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचे।
PPP Update : 5 लाख से ज्यादा आय वालों को नहीं मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार जिन परिवारों की वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें कई सरकारी योजनाओं के लाभ से बाहर किया जाएगा। पिछले समय में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें वास्तविक आय अधिक होने के बावजूद लोगों ने कम आय दिखाकर योजनाओं का फायदा लिया।
अब ग्राम सभा की बैठक में गांव के लोगों की मौजूदगी में परिवारों की आय की समीक्षा होगी। इससे यह तय किया जाएगा कि किस परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है। इसके बाद संबंधित रिपोर्ट जिला प्रशासन और विभाग को भेजी जाएगी।
PPP Update : अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी और अतिरिक्त उपायुक्त संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे। इसके अलावा परिवार पहचान पत्र में दर्ज आय, जमीन, व्यवसाय और अन्य जानकारियों की भी दोबारा जांच की जाएगी। जिन परिवारों की आय में बदलाव पाया जाएगा, उनका डेटा अपडेट किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से वास्तविक गरीब परिवारों को योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। फर्जी तरीके से लाभ लेने वालों की पहचान आसान होगी और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। ग्राम सभा के माध्यम से सत्यापन होने से स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बढ़ेगी और गांव के लोग खुद तय कर सकेंगे कि कौन वास्तव में सहायता का हकदार है।










