Meenakshi Goyat : डॉक्टर ने कहा था चल भी नहीं पाएगी, मीनाक्षी गोयत के हौसले और मेहनत के आगे ढेर हुई बाधाएं
विनेश फोगाट को हराने वाली मीनाक्षी गोयत के संघर्षों की कहानी, कैसे 26 किलो की लड़की बन गई अंतरराष्ट्रीय पहलवान
Meenakshi Goyat : हरियाणा डायरी, चाबरी (जींद) : मशहूर शायर और कवि दुष्यंत कुमार का प्रसिद्ध शेर है “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।” ऐसा प्रतीत हो रहा कि यह पंक्तियां भारतीय महिला पहलवान मीनाक्षी गोयत के लिए ही लिखी गई थी। यह रचना 1975 में प्रकाशित हुई और 51 साल बाद आज मीनाक्षी गोयत ने इन पंक्तियों को फिर से जीवंत कर दिया है।
क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पहलवान विनेश फोगाट को ट्रायल मैच में हराने वाली मीनाक्षी गोयत को एक समय पर डाक्टर ने यह तक कह दिया था कि वह पैर सीधा रख कर चल भी नहीं पाएगी, लेकिन मीनक्षी ने अपनी मेहतन से कमबैक किया और आज दिखा कि उनके हौसलों में कितनी जान है।
हरियाणा के जींद जिला मुख्यालय से गोहाना रोड पर महज 14 किलोमीटर चलने पर चाबरी गांव का बस स्टॉप आ जाता है। यूं तो चाबरी गांव हरियाणा के अन्य गांवों की तरह ही है, लेकिन आजकल बहुत खास हो गया है। क्योंकि चाबरी गांव की बेटी मीनाक्षी गोयत ने वह कर दिखाया है, जिससे गांव का नाम अचानक अंतरराष्ट्रीय पटल पर आ गया है।
सिर चढ़ा कुश्ती का जुनून
एशियाई खेलों के लिए ट्रायल मैच के दौरान बहुत ही चर्चित और नामी पहलवान विनेश फोगाट को हराने वाली 25 वर्षीय पहलवान मीनाक्षी गोयत के सिर पर शुरू से ही कुश्ती का जुनून था। शुरूआती पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल में हुई, लेकिन कुश्ती के प्रति लगाव बढ़ाता चला गया।
मीनाक्षी के पिता प्रेम सिंह बताते हैं कि कुश्ती के प्रति प्रेम को देखते हुए उसे गांव के पास ही निडानी खेल स्कूल में भेजा गया। तब मीनाक्षी का वजन महज 26 किलोग्राम था। करीब 2 साल प्रतिदिन आना-जाना हुआ, लेकिन फिर वहीं पर लड़कियों के हॉस्टल में छोड़ दिया। यहां से मीनाक्षी के खेल को नई धार मिली।
कोच ने पहचानी प्रतिभा
मीनाक्षी के पिता प्रेम सिंह के अनुसार जब व निडानी गांव स्थित स्पोर्ट्स स्कूल में पढ़ रही थी, तब 2012 में उनके कोच सुभाष थे। ऐसे में कोच सुभाष ने प्रेम सिंह से कहा कि लड़की में कुश्ती की अपार संभावनाएं हैं। इसके बाद से मीनाक्षी को खेल स्कूल में स्थाई रूप से रखा गया और पिता बेटी की खुराक के लिए प्रतिदिन घर से दूध लेकर हॉस्टल जाते थे।

फाइटर जॉन सीना को देख कर मैट की ओर बढ़ाए कदम
दरअसल मीनाक्षी गोयत WWE फाइटर जॉन सीना को देख कर कुश्ती की ओर आकर्षित हुई। फाइटर जॉन सीना ने उन पर इस प्रकार प्रभाव डाला कि जीवन ही बदल गया। इसके बाद मीनाक्षी गोयत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मीनाक्षी गोयत ने हरियाणा डायरी को बताया कि जॉन सीना को लड़ते हुए देख कर इतना रोमांच भर जाता था कि बस उसी समय फाइट का मन करने लगता।
मैट के साथ जीवन में भी संघर्ष
मीनाक्षी की जीत जीत पर आज हर कोई उनको जनने लगा है, वह एक दिन में नहीं आई है। इसके लिए मीनाक्षी को मैट से लेकर जीवन में कड़े संघर्ष किए हैं। क्योंकि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण तीनों भाई-बहनों को हॉस्टल में रहना पड़ा।
पिता साधारण किसान रहे। जब मीनाक्षी कुश्ती में अपना करियर बना रही थी, तभी उनकी मां को गले में कैंसर होने का पता चला। मीनाक्षी बताती हैं वह समय बहुत पीड़ादायक रहा।
क्योंकि मां को रोहतक एडमिट करवाना पड़ा और पापा उनके साथ रहते थे। ऐसे में तीनों भाई-बहनों को हॉस्टल में रहना पड़ा। अब पिता प्रेम सिंह हार्ट के मरीज हैं, लेकिन हर जगह मीनाक्षी के साथ रहते हैं।
पैर में आई चोट डाक्टर ने कहा सीधा पैर करके चल भी नहीं पाएगी
बात 2019 की है, तब मीनाक्षी शिरड़ी में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में भाग ले रही थी। उनके सभी मैच बहुत अच्छे जा रहे थे। सेमिफाइनल के दौरान पैर फिसल गया। पिता प्रेम सिंह बताते हैं कि इलाज के लिए मीनाक्षी को मुंबई ले जाया गया, वहां डाक्टर ने कहा कि खेलना तो दूर पैर सीधा कर चल भी नहीं पाएगी।
यह सुन कर पिता की आंखों के आगे अंधेरा छा गया, लेकिन मीनाक्षी ने मन ही मन फैसला कर लिया कि वे कुश्ती नहीं छोड़ेंगी। डेढ साल की कड़ी मेहनत और अभ्यास से दोबारा अपने आप को कुश्ती के लिए तैयार किया और आज परिणाम सबके सामने है।
भाई बहन भी कुश्ती के क्षेत्र में
मीनाक्षी से मिली प्रेरणा ने उसके भाई और बहन को भी कुश्ती के क्षेत्र में आगे बढ़ाया। मीनाक्षी का भाई 62 किलोग्राम भार वर्ग में तैयारी कर रहा है तो बहन अंजली 50 किलोग्राम में अपनी तैयारी कर रही हैं। फिलहाल मीनाक्षी का परिवार सोनीपत की इंडियन कॉलोनी में रहता है।
हालांकि मीनाक्षी ने 6 से 12 अप्रैल 2026 तक किर्गिस्तान के बिश्केक में हुई थी सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में सिल्वर पदक जीता है, लेकिन यह ट्रायल मैच उनका यादगार बन गया, जिसमें विनेश फोगाट को हरा कर चर्चित हुई। हालांकि 2021 में आगरा में हुए नेशनल खेलों में मीनाक्षी ने सभी मुकाबले जीते और उनके सामने कोई भी पहलवान 1 भी अंक अर्जित नहीं कर पाई।










