Mumbai Monsoon : मुंबई में नालों की सफाई के दौरान निकला ऐसा सामन अधिकारी भी देख कर चौंक गए
मानसून के सीजन से पहले करवाई जा रही है नालों की सफाई
Mumbai Monsoon : मानसून का सिजन सीर पर है और इससे पहले देश भर के शहरों में प्रशासन अपनी तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में मुंबई में भी नालों की सफाई करवाई जा रही है। इसके लिए बड़ी-बडी क्रेन लगाई गई हैं। इससे नालों को मानसून से पहले साफ किया जा रहा है ताकि बारिश के मौसम में शहर की जल निकास व्यवस्था सुचारू रहे। इस बार मानसून जल्दी आने की संभावना है, ऐसे में प्रशासन युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है।
बृह्नमुंबई नगर निगम के नालों की सफाई के लिए अधिकारियों ने 31 मई तक की समय सीमा तय की हुई है। अब यह कार्य अंतिम चरण में है। ऐसे में नगर निगम के अधीन आने वाले इन नालों की सफाई के दौरान ऐसा सामान निकला कि अधिकारी भी यह देख कर चौंक गए।
10 जून तक मानूसन पहुंचने की उम्मीद
दरअसल मौसम विभाग ने अनुमान दिया है कि मुंबई में इस बार 10 जून तक मानसून पहुंच सकता है।
इससे पहले ही बृह्नमुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा नालों की सफाई का काम पूरा करवाने के लिए अभियान चलाया गया है। क्योंकि नालों में अवरोध होने से बारिश का पानी सड़कों पर फैला जाता है। ऐसे में सफाई के दौरान नालों से सभी अवरोध हटाए जा रहे हैं। बारिश के पानी के बहाव में रूकावट पैदा करने वाले अवरोधों और गाद को हटाया जा रहा है।
ऑटो रिक्शा भी नाले में
BMC के अधिकारियों के अनुसार सफाई के दौरान अनुसार नालों की सफाई के दौरान बेड के गद्दे, सोफे, बेड, भारी इलेक्ट्रोनिक सामान जैसा कबाड़ भी निकाला गया है। यहां तक नाले में ऑटो रिक्शा भी मिला है। जिसको निकाल दिया गया है। निगम द्वारा नालों की सफाई का 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार बारिश में जलभराव की समस्या नहीं होगी।
नालियों में कचरा फेंका तो होगी कार्रवाई
नालों में इस प्रकार का कबाड़ मिलने से BMC सख्त हो चला है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार BMC ने कबड़ा नालों में फेंकरने वालों पर कार्रवाई की बात कही है। अब निगम ने तय किया है कि जुर्माना भी कबड़ा के आकार के हिसाब से वसूला जाएगा। इसमें 200 रुपये से 5000 रुपये तक के जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
मुंबई में मानसून क्यों है खास
हालांकि मुंबई में बारिश सामान्य रूप से होती रहती है, लेकिन मानसून में व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। न्यूज 18 हिंदी के अनुसार मानसून के मौसम में मुंबई के लोग डर जाते हैं। सड़क यातायात के साथ-साथ मुंबई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन तक इससे प्रभावित होती हैं। बेशक मुंबई दुनिया के सबसे बड़े शहरों में शुमार है, लेकिन बारिश के आगे घुटने टिक जाते हैं।
जल निकासी व्यवस्था की क्षमता कम
दअरसल मुंबई में पानी की निकासी की व्यवस्था बहुत पुरानी है। यह व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। हालांकि समय के साथ इसमें बदलाव हुए हैं, लेकिन यह नाकाफी हैं। मुंबई में जो भी भूमिगत वर्षा जल निकासी प्रणाली चल रही है, वह प्रति घंटे 25 एमएम बारिश के लिए डिजाइन है। हालांकि इस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए नई योजना तैयार हुई, लेकिन अभी तक पूरी तरह से काम नहीं हो पाया है।
3500 किलोमीटर की निकासी लाइन
हालांकि मुंबई शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए व्यापक व्यवस्था है। मुंबई शहर, इसके साथ पूर्वी और पश्चिम उपनगर के पूरे क्षेत्र में करीब 3,500 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन है। वहीं मुंबई की आबादी करीब सवा करोड़ है और यह विश्व के बड़े शहरों में शामिल है।वर्तमान फैलाव के साथ बात की जाए तो मुंबई का क्षेत्रफल करीब 603 वर्ग किलोमीटर का बनता है। वहीं इसके आसपास के क्षेत्रों को साथ में जोड़ा जाए तो यह क्षेत्रफल 6,328 वर्ग किलोमीटर पहुंच जाता है।










