नेशनल हाईवे पर AI निगरानी, हादसे के 10 मिनट भीतर सहायता, जानें NHAI का नया प्लान
हरियाणा डायरी, नई दिल्ली :
NHAI Hi-Tech Emergency Plan : देशभर में सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए NHAI ने देश के संवेदनशील और दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों की विशेष मैपिंग शुरू कर दी है, जिसके बाद नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट होने के बाद एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में अधिकतम 10 मिनट का समय लगेगा।
NHAI की रिपोर्ट के अनुसार देश के लगभग 80 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में से करीब 20 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 16 हजार किलोमीटर ऐसा है, जहां सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। इन क्षेत्रों को “क्रिटिकल जोन” या “ब्लैक स्पॉट” के रूप में चिन्हित किया गया है।
इन इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौती समय पर इलाज पहुंचाना रही है। कई मामलों में एंबुलेंस देर से पहुंचने के कारण घायलों की जान चली जाती है। इसी समस्या को देखते हुए अब रियल टाइम मॉनिटरिंग और GPS आधारित इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लागू किया जा रहा है।

NHAI Emergency Plan : हर 100 किलोमीटर पर हाई अलर्ट
NHAI ने देशभर के 278 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की है, जहां लगभग 70 प्रतिशत सड़क हादसे होते हैं। इसके अलावा 80 हजार किलोमीटर लंबे हाईवे नेटवर्क में 18 राज्यों के 100 जिलों को भी अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यम प्रदेश, दिल्ली क्षेत्र शामिल हैं।
NHAI Emergency Plan : नई योजना के तहत ये प्रारूप किया तैयार
- हाईवे पर मौजूद एंबुलेंस को GPS से जोड़ा जाएगा
- कंट्रोल रूम से रियल टाइम ट्रैकिंग होगी
- दुर्घटना की सूचना मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट भेजा जाएगा
- ट्रैफिक और दूरी के आधार पर सबसे नजदीकी मेडिकल यूनिट को मौके पर रवाना किया जाएगा
- अभी कई जगहों पर एंबुलेंस पहुंचने में औसतन 15 मिनट या उससे अधिक समय लग जाता है। नई प्रणाली लागू होने के बाद यह समय घटकर 10 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
NHAI Emergency Plan : हर साल लाखों लोग गंवाते हैं जान
भारत में हर वर्ष लगभग 50 हजार से 75 हजार लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में समय पर इलाज न मिलने के कारण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि “गोल्डन ऑवर” यानी हादसे के बाद का पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है।
यदि इस दौरान घायल को मेडिकल सहायता मिल जाए, तो बड़ी संख्या में जानें बचाई जा सकती हैं। NHAI अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लाइव ट्रैफिक डेटा और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की निगरानी करेगा। इससे दुर्घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ रेस्क्यू ऑपरेशन भी तेज होगा।










