Marriage with NRI : एनआरआई से विवाह जोखिम भरा
सफीदों के कालेज में हुआ जागरूकता सेमिनार
Marriage with NRI: एनआईआर से विवाह करने को लेकर हरियाणा के सफीदों स्थित मैटिस ड्रिग्री कालेज में जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य मिस डेलीना खोगडप, हरियाणा राज्य महिला आयोग चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने विशेषतौर पर शिरकत की।
इस दौरान एनआरआई से विवाह करना या न करना विषय पर छात्राओं को जागरूक किया गया। यह सेमिनार डा. भीमराव अंबेडकर ला यूनिवर्सिटी सोनीपत व राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य मिस डेलीना खोगडप रहीं। जबकि विशिष्ट सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ भीमराव अंबेडकर ला यूनिवर्सिटी सोनीपत के कुलपति देवेंद्र सिंह, हरियाणा स्टेट कमिशन फार वूमेन के अध्यक्ष रेनू भाटिया, चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति डा रामपाल सैनी रहे।
Marriage with NRI: इस दौरान हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने कहा कि एनआरआई विवाह आज समाज में एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। कई बार विदेश में बसने की इच्छा, परिवार की उन्नति की उम्मीद या समाजिक प्रतिष्ठा के चलते लोग एनआरआई व्यक्तियों से विवाह को प्राथमिकता देने लगते हैं। लेकिन कई मामलों में धोखाधड़ी, परित्याग, फर्जी पहचान, नागरिकता संबंधी समस्याएं और कानूनी उलझनें भी सामने आती रहती हैं।
Marriage with NRI: हरियाणा में 42 मामलों की शिकायत
हरियाणा राज्य महिला आयोग चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने यह कहा कि हरियाणा में महिला आयोग के पास 42 केस ऐसे हैं, जिनमे ऐसे एनआरआई लड़के पाए गए हैं। जिन्होंने विदेश में भी शादी कर रखी है और यहां भी शादी कर रखी है लड़कों के माता-पिता बहू को प्रताड़ित करते हैं। एनआरआई विदेश में दूसरी शादी करके अपनी पत्नी का शोषण कर रहे हैं। रेनू भाटिया ने करनाल के मशहूर केस सुनील जांगड़ा पर 4 शादी करने का मामला दर्ज किया गया है के बारे में बताया। भाटिया ने छात्राओं भारत की शक्ति बताते हुए एनआरआई के चक्कर में नहीं पड़ने के लिए आह्वान किया।
वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या डेलिना खोगडप ने कहा कि एनआरआई विवाह करते कुछ सावधानियों की आवश्यकता है। इसके लिए कुछ कानूनी जानकारियां जरूर ले लें। साथ ही इस प्रकार के विवाह में क्या संभावित खतरे हो सकते हैं, इसके बारे में भी विचार कर लें। उन्होंने कहा कि एनआरआई विवाह तभी सफल हो सकता है जब वह पारदर्शिता, सही जानकारी, विश्वसनीयता और कानूनी सुरक्षा के साथ किया जाए।

Marriage with NRI: एनआरआई विवाह के लाभ
उन्होंने कहा कि एनआरआई विवाह से परिवार को अंतरराष्ट्रीय exposure मिलता है। साथ ही विदेश में शिक्षा, नौकरी और व्यवसाय के नए अवसर भी यह विवाह देते हैं। इसके अलावा बहुसांस्कृतिक समाज में जीवन जीने का अनुभव
आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में सुधार की संभावनाएं भी खुलती हैं।
Marriage with NRI: एनआरआई विवाह के जोखिम
इसके साथ ही इस प्रकार के विवाह में कई प्रकार के जोखिम भी छिपे होते हैं। गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की संभावना रहती है। एनआई विवाह में देखने को आया है कि विवाह के बाद पत्नी की उपेक्षा या परित्याग के मामले सामने आते हैं। विदेशी कानूनों की जटिलताएं भी रहती हैं और घरेलू हिंसा के मामले होने पर सहायता प्राप्त करने में कठिनाई आती है। इसके अलावा वीज़ा, नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़ी जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
Marriage with NRI: महिलाओं की सुरक्षा व मदद के लिए आयोग तैयार
राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या ने बताया कि यदि इस प्रकार की स्थिति में कोई महिला फंसती है तो राष्ट्रीय महिला आयोग हमेशा मदद के लिए तैयार रहता है। मिस डेलीना के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग एनआरआई विवाह मामलों में पीड़ित महिलाओं को हेल्पलाइन, काउंसलिंग, कानूनी सहायता और विदेश मंत्रालय से समन्वय जैसी कई सुविधाएं प्रदान करता है। 14490 हेल्पलाइन के अलावा आनलाइन शिकायत पोर्टल भी चलाया जा रहा है। ऐसे में किसी भी एनआरआई विवाह से पहले परिवार जांच-पड़ताल अवश्य कर लें। एनआरआई लड़के के पासपोर्ट, वीज़ा स्टेटस, नौकरी, परिवार, निवास स्थान और कानूनी स्थिति की पूरी पुष्टि करने के बाद ही विवाह का फैसला लें।










