Super el nino 2026 : हरियाणा, पंजाब में सितंबर में दिखेगा सूखे का असर
सुपर अल नीनो के कारण कमजोर पड़ सकता है मानसून, इसी महीने सक्रिय होने की संभावना सर्दियों तक रहेगा असर
Super el nino 2026 : बिगड़ते आर्थिक हालात के बीच एक देश की अर्थ व्यवस्था को प्रभावित करने वाली एक और खबर आ रही है। हालांकि वैज्ञानिक पहले ही कह चुके हैं कि इस बार अल नीनो के कारण देश के कई क्षेत्रों में भयंकर सूखा हो सकता है।
वहीं इसका असर सबसे अधिक अन्न पैदा करने वाले हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में सितंबर महीने में दिखेगा। इसके कारण इन राज्यों में भी सूखे की स्थिति बन सकती है।
मौसम को लेकर अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा यह भविष्यवाणी की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बार भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। अल नीनो का असर भारत में मई महीने से ही दिखना शुरू हो सकता है। यह असर सर्दियों तक बना रहेगा।
सामान्य से 0.5 डिग्री अधिक तापमान
अमेरिकी मौसम एजेंसी का कहना है कि इस बार प्रशांत महासागर का तापमान 0.5 डिग्री अधिक आंका जा रहा है। इसका असर सीधे रूप में मानसून पर पड़ सकता है। क्योंकि संभावना जताई जा रही है कि तापमान की यह वृद्धि पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। इसकी संभावना काफी अधिक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने भी माना है कि प्रशांत महासागर में बने अधिक तापमान के कारण मानसून प्रभावित हो सकता है। परिणाम स्वरूप सूखे की स्थिति बन सकती है।
भविष्यवाणी पूरी होने की संभावना 82%
अल नीनो का असर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया पर पड़ता है। यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है। अब अमेरिकी एजेंसी ने जो रिपोर्ट दी है, इसके अनुसार अल नीनो का प्रभाव आने की संभावना 82% हो गई है। हालांकि पहले इसकी संभावना 61 प्रतिशत जताई जा रही थी।
ऐजेंसी का कहना है कि वर्ष 2026 में अल नीनो का प्रभाव मई से जुलाई के शुरू हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इसका प्रभाव सर्दियों तक यानी अगले साल फरवरी तक रह सकता है। साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि अल नीनो का प्रभाव अधिक और अत्यधिक हो सकता है।
जानें अल नीनो के बारे में
अल नीनो एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। इसके कारण समुंद्र के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। मौसम विशेषज्ञ डा. सापेक्ष सिंह के अनुसार समुंद्र का तापमान बढ़ने के प्रभाव से हवा का पैटर्न भी बदल जाता है। परिणाम स्वरूप दुनियाभर में यह बारिश के चक्र को प्रभावित करता है या बिगाड़ देता है।
इसके कारण भयंकर सूखा हो सकता है, लेकिन हीं पर अत्यधिक बारिश भी हो सकती है। क्योंकि अल नीनो के सक्रिय होने के कापरण प्रशांत महासागर से जो मानसूनी हवाएं भारत की ओर आती हैं, वह रूक जाएंगी। ऐसे में बारिश भी कम होगी।
ऐसे आता है प्रभाव
डा. सापेक्ष सिंह के अनुसार अल नीनो के प्रभाव के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलता है। अब तक हुए शोधों के अनुसार दक्षिण एशिया विशेषकर भारत जैसे क्षेत्रों में इसके कारण बारिश में काफी कमी आती है। वहीं गर्मी बढ़ जाती है। वहीं भारत के पूर्वी देशों जैसे इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में नमी प्रभावित होती है और सूखी हवाओं के यहां शुष्क मौसम हो जाता है। इसके कारण स्थानीय स्तर पर कई प्रभाव आते हैं।
जानें भारत में कौन का क्षेत्र कैसे होगा प्रभावित
डा. सापेक्ष सिंह बताते हैं कि अल नीनो के कारण मध्य भारत के साथ उत्तर और पश्चिमी क्षेत्रों में बारिश पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। यानी बारिश कम होगी सूखा पड़ सकता है। वहीं उत्तरी क्षेत्रों की बात की जाए तो हरियाणा और पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में अगस्त और सितंबर के दौरान इसका असर दिखता है।
राजस्थान के कुछ क्षेत्र कम प्रभावित होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में भी अल नीनो का प्रभाव कम दिखेगा। यानी मानसून के अंतिम दौर में हरियाणा, पंजाब के साथ राजस्थान के कुछ क्षेत्र प्रभावित होंगे। यह राज्य अल नीनो के कारण सबसे अधिक प्रभावित होंगे। वहीं मानसून के कारण भारत के पश्चिमी क्षेत्रों में भी सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
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