PM आवास योजना में AI की एंट्री, पक्का या कच्चा घर, अब इंसान नहीं, AI करेगा फैसला
हरियाणा डायरी, चंडीगढ़।
PM Housing Scheme AI Entry : प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्र परिवारों को पक्का मकान देने की प्रक्रिया अब और अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित होने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकारें योजना में होने वाली गड़बड़ियों तथा अपात्र लोगों को मिलने वाले लाभ को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेने जा रही हैं।
इसके तहत अब AI तकनीक यह जांच करेगी कि आवेदक का घर वास्तव में कच्चा है या पहले से पक्का मकान मौजूद है। योजना के तहत पात्रता जांच के लिए एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस परियोजना में सर्वे करने वाले कर्मचारी लाभार्थियों के घरों की तस्वीरें मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड करेंगे।
इसके बाद एआई तकनीक उन तस्वीरों का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि मकान की दीवारें, छत और अन्य संरचना कच्ची है या पक्की। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई फोटो में मौजूद निर्माण सामग्री, दीवारों की बनावट, छत की गुणवत्ता और अन्य संकेतों का अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार करेगा। इससे पात्रता निर्धारण में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी।
PM Housing Scheme AI : फर्जी लाभार्थियों पर कसेगा शिकंजा
अब तक कई क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ ऐसे लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल गया जिनके पास पहले से पक्का मकान था। वहीं कई वास्तविक जरूरतमंद परिवार लाभ से वंचित रह गए।
नई व्यवस्था के तहत सर्वे के दौरान घर की तस्वीरों के साथ-साथ जियो-टैगिंग और लोकेशन आधारित सत्यापन भी किया जाएगा। यदि किसी आवेदक ने गलत जानकारी दी है या वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया है, तो एआई सिस्टम उसकी पहचान करने में मदद करेगा।
राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए करीब एक लाख आवेदनों की जांच प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि एआई आधारित सत्यापन से बड़ी संख्या में आवेदनों की तेजी और निष्पक्षता से जांच संभव होगी।
PM Housing Scheme AI : अंतिम फैसला फिर भी अधिकारियों का
हालांकि AI केवल तकनीकी विश्लेषण और रिपोर्ट तैयार करेगा। अंतिम निर्णय संबंधित विभाग और अधिकृत अधिकारियों द्वारा ही लिया जाएगा। एआई की रिपोर्ट को सहायक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाएगा ताकि पात्र परिवारों तक योजना का लाभ सही तरीके से पहुंच सके।
सरकार का मानना है कि एआई आधारित सर्वेक्षण से प्रधानमंत्री आवास योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा तथा वास्तविक जरूरतमंद गरीब परिवारों को पक्के घर का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे देशभर में लागू किया जा सकता है।










