Railways New Change: रेलवे से हटेगी अंग्रेजों के जमाने की छाप, स्वदेशी होगा पहवाना, ब्रिटिश काल के चिन्ह भी हटेंगे

अगले 4 दिन में यानी 14 मई तक दिया जाएगा पूर्ण भारतीय स्वरूप, प्रयागराज स्थित कोरल क्लब से धातु का लोगो से लेकर ड्रेस तक में होगा बदलाव। गार्ड को भी मिलेगा नया नाम। आइए जानते हैं इन बदलावों के बारे में।

Railways New Change: भारतीय रेलवे में अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही कई परंपरा अब पूर्ण से बदल जाएंगी। जो भी ऐसी वस्तु, स्थान, चिन्ह हैं, जिनसे ब्रिटिश काल का आभास होता है, उनको बदला या हटाया जाएगा। इसके लिए रेलवे ने खास तैयारी कर ली है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रेलवे में स्वदेशी व्यवस्था लागू हो।

इसके लिए भारतीय रेलवे द्वारा अपने देश भर के सभी जोन में व्यवस्था बदलने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाना है कि हर हाल में 14 मई तक यह व्यवस्था बदल दी जाए। इसके तहत ऐसी सभी वस्तुओं, चिन्हों के साथ प्रथाओं को भी बदला या हटाया जाना है, जो भारत की गुलामी को रेखांकित करती हैं।

कोरल क्लब से हटेगा धातु निर्मित चिन्ह

दरअसल यह क्लब प्रयागराज के ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन पर है। कोरल क्लब का निर्माण अंग्रेज रेलवे अधिकारियों द्वारा अपने मनोरंजन के लिए वर्ष 1924 में बनाया गया। यहां क्लब में तीसरे और चौथे दर्जे के कर्मचारियों के मनोरंजन की व्यवस्था रहती थी।

हालांकि बाद में इसको रेलवे द्वारा बारात घर के रूप में संचालित करना शुरू कर दिया। दिल्ली-हावड़ा रूट पर यह महत्वपूर्ण स्टेशन और ब्रिटिश काल की इमारत है। इसी कोरल क्लब में ईस्ट इंडियन रेलवे के समय का एक लोगो लगा हुआ है। यह धातु से निर्मित है। अब इसको भी हटाया जाएगा।

बदल जाएंगे अंग्रेजों के जमाने के पदनाम

इतना ही नहीं स्वदेशी व्यवस्था के तहत ऐसे पदनामों को भी बदला जाएगा, जो पराधीनता की याद दिलाते हैं। इसके तहत की जा रही नई व्यवस्था के अनुसार अंग्रेजों के जमाने से चले रहे गार्ड को नया पदनाम मैनेजर मिल जाएगा। साथ ही रेलवे में तैनात होने वाली खलासी को नई पहचान अपने पदनाम सहायक के रूप में मिलने जा रही है। रेलवे की पटरियों पर लगे मील के पत्थरों अब से किलोमीटर पोस्ट कहलाएंगे। रेलवे स्टेशन पर लगी पुरानी और पीतल की घंटी की जगह अब आधुनिक डिजिटल उपकरण लेने वाले हैं।

कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्रेस में होगा बड़ा बदलाव

इसके साथ साथ ही रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया है कि रेलवे में कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए ब्रिटिश काल से चल आ रहे ड्रेस कोड में भी स्वदेशी व्यवस्थाओं के अनुरूप बदलाव किया जाएगा। जैसे कि रेलवे में बंद गला कोट का प्रचलन रहा है। अब इसकी जगह भारतीय परंपरा वाले सूट लेंगे।

साथ ही रेलवे अधिकारियों की वर्दी पर लगने वाले पीतल के बटन को भी बदला जाएगा। स्वदेशी होने के साथ-साथ इन पर अशोक चक्र अंकित कर स्वदेशी पहचान दी जाएगी। साथ ही भारतीय जलवायु के अनुसार ही अन्य ड्रेस भी तैयार होगी। इसमें वर्तमान भारतीय रेल के लोगों वाली टाई को भी शामिल किया जा रहा है। हालांकि रेलवे में बड़े स्तर पर पहले ही खादी का प्रयोग होता है।

सैलून कोच में भी बदलाव की तैयारी

इस व्यवस्था के तहत रेलवे अब अपने सैलून कोच में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है। क्योंकि सैलून कोच रेलवे ट्रैक पर महल जैसा अनुभव करवाते हैं, ऐसे में इनको आधुनिक और भारतीय शाही व्यवस्थाओं के अनुसार बदला जाएगा। साथ ही इन सैलून कोच में कई प्रकार के सैंसर भी लगेंगे, जिससे यात्रियों को अरामदायक यात्रा के साथ सुरक्षित सफर की भी सुविधा मिल सके।

अंग्रेजों के इतिहास से भारतीय पहचान

बेशक भारत की गुलामी के दौर में रेलवे की शुरूआत अंग्रेजों द्वारा की गई, लेकिन अब भारतीय रेल नए युग में प्रवेश कर रही है। इसमें बुलेट ट्रेन से लेकर वंदेभारत और नमो रेल जैसे नए प्रयोग यात्रियों लिए सफर के अनुभव के साथ-साथ रेलवे की पहचान को भी बदल रहे हैं। ऐसे में नए भारतीय स्वरूप में गुलामी के चिन्ह भी गायब हो जाएंगे।

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