Communal Harmony : राजस्थान में हिंदू – मुस्लिम एकता की अनोखी कहानी, हिंदू परिवार ने मस्जिद के लिए दी जमीन
नमाज के लिए कम पड़ रही थी जगह, हिदुओं ने बिना पैसे लिए ही कर दिया नेक काम
Communal Harmony : भारत में हिंदू- मुस्लिम एकता को गंगा-जमुनी तहजीब के रूप में जाना जाता है। ऐसा ही मामला अब भारत के उत्तर क्षेत्र के राज्य राजस्थान से सामने आया है। यहां मस्जिद में जगह कम पड़ रही थी तो हिंदू परिवारों ने इसके लिए अपनी निजी जमीन दे दी। इतना ही नहीं, इस जमीन के लिए कोई पैसा तक नहीं लिया। बस जैसे ही मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिद के लिए उनसे जमीन मांगी और बताया कि मस्जिद की जगह छोटी पड़ रही तो, तुरंत जमीन देने को हां कह दिया।
दरअसल राजस्थान के सीकर जिला में नीमकाथाना क्षेत्र में गुहाला गांव यह मस्जिद काफी पुरानी बताई जा रही है। ईद के मौके पर तो दूसरे क्षेत्रों से भी लोग यहां पर आते हैं। ऐसे में मस्जिद छोटी पड़ जाती है। इस पर गांव के हाजी मोहम्मद ने मस्जिद के लिए जगह देने का प्रस्ताव हिंदू परिवार के समक्ष रखा। यह जमीन हिंदू परिवार के 5 भाईयों की है। जैसे ही उनके पास यह प्रस्ताव आया, उन्होंने बिना किसी पैसे के जमीनी देने को कह दिया। साथ ही यह भी कहा कि जितनी चाहें जमीन ले सकते हैं।
करीब 15 फुट जमीन की दान
दरअसल मस्जिद के साथ-साथ सैनी परिवार का खेत लगता है। उन्हें बताया कि करीब 15 फुट जमीन में मस्जिद की चौड़ाई बढ़ जाएगी। इस पर उन्होंने अपने खेत से करीब 15 फुट चौड़ी और मस्जिद की लंबाई तक यह जमीन दे दी। जमीन देने वाले पूरणमल सैनी ने कहा कि यदि अन्य किसी धार्मिक कार्य के लिए भी जमीन की जरूरत पड़ती है तो वे बिना किसी पैसे के देने को तैयार हैं। इतना ही नहीं मुस्लिम समाज के लोगों ने भी हिंदुओं के हाथों से ही नींव रखवाई और यहां दीवार बनाई गई। देश भर में इस परिवार द्वारा जमीन देने की तारीफ की जा रही है।
कुछ लोगों ने बताया गलत
पूरणमल सैनी के अनुसार कुछ लोगों ने मस्जिद के लिए जमीन देने को गलत बताया है। साथ ही कहा कि मंदिर के लिए जमीन दे सकते थे। ऐसे लोगों को संदेश यही है कि यदि मंदिर के लिए भी जमीन चाहिए होगी तो वे दे देंगे। इसके लिए भी कोई पैसा नहीं लिया जाएगा। दरअसल गांव में सभी समुदायों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं। ऐसे में किसी दूसरे धर्म के कारण काम नहीं आने का कोई मतलब नहीं है।

पैसे अधिक मायने रखता है प्यार
मस्जिद के लिए जमीन दान करने वाले पूरणमल सैनी कहते हैं कि पैसा जीवन में अधिक मायने नहीं रखता। प्यार अधिक मायने रखता है। इसीलिए ईदगाह जमीन की जरूरत की बात आई तो बिना हिचक के लिए राजी हो गए। हालांकि इसके लिए मुस्लिम समाज के लोगों की ओर से पैसे देने की बात भी कही गई, लेकिन यह जमीन बिना पैसे के ही दी गई है। क्योंकि ईदगाह में मुस्लिम समाज के लागों को नमाज अदा करने की जगह कम पड़ रही थी। आसपास के गांवों में मुस्लिम आबादी तो है, लेकिन मस्जिद नहीं है। ऐसे में यह लोग भी गुहाला गांव में ही नमाज के लिए आते हैं।
सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा
राजस्थान की इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर आने के बाद इसकी काफी चर्च हो रही है। लोग इस कदम की काफी सराहना कर रहे हैं। ग्रामीण नवाब कुरैशी हिंदुओं को जैसे ही यहां जगह कम होने का पता चला, गांव के सैनी परिवार के भाईयों ने ईदगाह और मस्जिद की सीमा से लगने वाली अपनी जमीन दान करने के लिए सहमति दे दी। हालांंकि इस मुद्दे पर लोग राजनीति भी कर रहे है, लेकिन लोगों को यह फैसला काफी अच्छा लग रहा है।










