NHAI का एक्सप्रेसवे मॉडल बना चर्चा में, नहीं होगी धूल और धुआं की मार, क्या है ऑक्सीजन एक्सप्रेसवे ग्रीन प्लानिंग
NHAI Green corridor : नेशनल हाईवे का सफर हो और दोनों तरफ फूलों की खुशबू हो तो सफर थकावट भरा नहीं रहता। ऐसा ही एक्सप्रेसवे NHAI द्वारा तैयार किया जा रहा है, जो एक तरह से नेचर थैरेपी का काम करेगा। जी हां, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का ड्रीम प्रोजक्ट दिल्ली नोएडा ग्रीन कोरिडोर एक्सप्रेस वे तैयार हो रहा है।
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस अपने नाम के अनुसार ही महकता नजर आएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 32 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण सेक्टर-65 में बन रहे डीएनडी फरीदाबाद सोहना एक्सेस कंट्रोल प्वाइंट से शुरू हो रहा है। यह केजीपी को कनेक्ट देते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ हरित पट्टी और इसकी फेंसिंग व रेलिंग पर सुगंधित पौधे रोपेगा।
सुगंधित फूलों के अलावा यहां कार्बन डाईआक्साइड अवशोषित करने वाले बांस के पौधे भी रोपे जाएंगे। NHAI द्वारा करीब 17 हजार पौधे रोपने का प्लान है, जिनमें बांस के अलावा खुशबू वाली पांच से छह तरह के फूल व बेल लगाई जाएंगी।

NHAI Green corridor : एक्सप्रेस वे पर लगेंगे ये पौधे
दिल्ली नोएडा ग्रीन कोरिडोर पर मधुकामिनी, हारसिंगार, कचनार, चंपा, रात की रानी और चमेली की बेल लगाई जाएंगी। दरअसल हारसिंगार का फूल रात को खिलता है और यह बहुत ही सुगंधित होता है। सफेद-केसरिया रंग वाले फूल रात को खिलते हैं और सुबह जमीन पर गिरे मिलते हैं, इससे इनकी खुशबू दूर तक सुगंध देती है। इससे रात और सुबह के समय वाहन लेकर आने-जाने वाले लोगों को ताजगी का एहसास होगा।
वहीं कचनार के फूल-फूल वसंत और गर्मियों में भीनी और मनमोहक खुशबू बिखेरते हैं। एक्सप्रेसवे के डिवाइडर पर लगने वाले चंपा लोकप्रिय फूलों में शुमार है। इसके सफेद या पीले फूलों में ताज़ा और मीठी खुशबू होती है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी इसकी जानकारी दी गई है।
NHAI Green corridor : कॉर्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित करेगा बांस का पेड़
बता दें कि केंद्र सरकार ने पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन शुरू कर दिया है और इसके तहत गैर-वन क्षेत्रों में उगने वाले बांस को पेड़ों की श्रेणी से बाहर करके उसे घास माना गया। वनस्पति वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि बांस का पौधा सबसे तेजी से बढ़ता है। यह एक दिन में करीब 120 सेंटीमीटर बढ़ जाता है। इसके अलावा बांस का पेड़ CO2 को अवशोषित करते हुए दूसरे पेड़ों की तुलना में 35 प्रतिशत ज्यादा ऑक्सीजन देता है। इससे ताजी हवा मिलेगी तो वहीं प्रदूषण भी कम होगा।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर दोनों तरफ हरियाली व फूलों की खुशबू से लोग ताजगी महसूस करेंगे और सुखद यात्रा अनुभव करेंगे। NHAI के ग्रीन एक्सप्रेस वे सहायक टीम लीडर रविश कुमार ने बताया कि NHAI का टारगेट है कि दिल्ली एनसीआर में जैसे ही मानसून दस्तक देगा, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 17 हजार पौधे लगाने का अभियान शुरू कर दिया जाएगा।










